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एक मंच पर अखिलेश-शिवपाल, पूर्व सीएम ने चाचा के छुए पैर, लेकिन इशारों में साधा एक दूसरे पर निशाना

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव ने शुक्रवार (2 मार्च) को अपने पैतृक गांव सैफई में होली के एक कार्यक्रम में साथ में मंच साझा किया। इस दौरान अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव के कुर्सी से उठकर पैर छुए, लेकिन एक-दूसरे का नाम लिए बगैर निशाना भी साधा।

सैफई में आयोजित होली के कार्यक्रम में यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव के साथ मंच साझा किया। (फोटो सोर्स- यूट्यूब के वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट)

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव ने शुक्रवार (2 मार्च) को अपने पैतृक गांव सैफई में होली के एक कार्यक्रम में साथ में मंच साझा किया। इस दौरान अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव के कुर्सी से उठकर पैर छुए, लेकिन समारोह में एक-दूसरे का नाम लिए बगैर निशाना भी साधा। ईटीवी भारत यूपी के यूट्यूब चैनल पर जारी किए गए एक वीडियो में शिवपाल यादव कहते हुए दिख रहे हैं कि जहां पर एकता होती है, वहां त्योहार और खुशी से मनाया जाता है। समारोह में शिवपाल समर्थकों की तरफ से उनके समर्थन में नारे लगाए गए थे, जिन्हें लेकर अखिलेश यादव ने आपत्ति दर्ज कराई। अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव का नाम लिए बगैर कहा- ”कुछ लोग कभी सुधर नहीं सकते, कुछ लोग सुधर जाओ तो अच्छा है, होली का त्योहार खुशी से मनाएं हम लोग क्योंकि आगे देखना है, आगे क्या रास्ता है।”

अखिलेश यादव ने आगे कहा- ”आगे का रास्ता नहीं देखोगे तो अभी खाई से निकलकर आए हो, अंधेरे से निकलकर आए हो, और ये मत समझना कि अभी उजाला यहीं पर है तो अंधेरा कहीं नहीं होगा, अगर उजाला यहां है तो हो सकता है कि अंधेरा कहीं हो, और जरूरी नहीं कि यहां अंधेरा हो तो कहीं पर उजाला नहीं होगा, इसलिए बहुत समझदार बनिए, होली का त्योहार खुशी से मनाने का है, गले लगाने का है, लेकिन नारे लगाने का नहीं है। ये नारे लगाने का त्योहार नहीं है। जो समझदार नहीं हैं, जो नारा लगा रहा था वही कह रहा जिंदाबाद, इतनी तो पहचान राजनीति में हम भी रखते हैं थोड़ी-बहुत। इसलिए त्योहार की बधाई-शुभकामनाएं।”

अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा- ”यहां से वहां पर हम पहुंचे हैं, किसी को शक नहीं होना चाहिए, किसी को कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए, जिस ऊंचाई पर पहुंचे, उस ऊंचाई तक जाने के लिए बहुत सारे रास्ते हैं, लेकिन बिना जनता के आशीर्वाद के नहीं पहुंच सकता कोई। इसलिए मेरे अंदर कोई गलतफहमी नहीं है, हम कोई गलत फहमी पालकर नहीं चलते। इसलिए मैं कहता हूं कि नारे लगाओ लेकिन समझदारी से नारे लगाना, इन नारों ने ही सब कुछ बिगाड़ा है याद रखना। और वो सब रिकॉर्डिंग है उस जमाने की हमारे पास, वो चेहरे हमें पता हैं, पहचानते हैं, टीवी पर चले हैं वो चेहरे। स्थानीय मीडिया के अनुसार सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव तबीयत खराब होने के कारण समारोह में शामिल नहीं हुए।

इससे पहले शिवपाल ने कहा- ”जहां पर एकता होती है, वहां पर और खुशी से मनाया जाता है, बहुत खुशी से मनाया जाता है, वैसे तो आप लोग जानते हैं, बहुत से लोग, बहुत से लोग गांव-गांव में जानबूझकर के गुटबंदी कराते हैं और ऐसे लोगों से तो बहुत सावधान रहना। जहां भी थोड़े कहीं मनमुटाव आते हैं, छोटे-छोटे झगड़े होते हैं गांव-गांव में तो उसमें आपस में बैठकर के निपटा लेना चाहिए।”

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