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Padma Bhushan : केरल के पूर्व डीजीपी का सवाल- नांबी को क्यों दे रहे सम्मान, उन्होंने देश के लिए किया ही क्या?

केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार ने इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन को पद्म भूषण पुरस्कार देने पर सवाल उठाए हैं। पूर्व डीजीपी ने पूछा है, ‘‘जिन्होंने नांबी को यह पुरस्कार दिया है, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि देश के लिए नांबी ने क्या योगदान दिया?’’

Author January 27, 2019 12:33 PM
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन और केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार। फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस

केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार ने इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन को पद्म भूषण पुरस्कार देने पर सवाल उठाए हैं। पूर्व डीजीपी ने पूछा है, ‘‘जिन्होंने नांबी को यह पुरस्कार दिया है, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि देश के लिए नांबी ने क्या योगदान दिया? इसरो में जो हुआ, उसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने समिति बना रखी है। समिति का फैसला आने से पहले नांबी को सम्मान कैसे दे सकते हैं?’’

नांबी पर लगे थे जासूसी के आरोप : बता दें कि नवंबर 1994 में पाकिस्तान को रॉकेट इंजन की खुफिया जानकारी देने के आरोप में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक और क्रायोजनिक प्रोजेक्ट के निदेशक एस नांबी नारायणन समेत 2 वैज्ञानिकों डी शशिकुमारन और के चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था। कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन वैज्ञानिकों की गिरफ्तारी को गलत करार दिया था। बेगुनाही का फैसला आने के दो दिन बाद ही के चंद्रशेखर का निधन हो गया था।

पूर्व डीजीपी बोले- निचले दर्जे के वैज्ञानिक हैं नांबी : पूर्व डीजीपी ने नांबी को निचले दर्जे का वैज्ञानिक करार दिया। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है, ‘‘सुप्रीम कोर्ट की समिति इसरो जासूसी मामले की जांच कर रही है। इसके बावजूद सरकार ने नांबी को पद्म पुरस्कार देने की घोषणा कर दी। यह गलत है।’’

इन्हें भी दे दो पद्म पुरस्कार : पूर्व डीजीपी ने कहा, ‘‘अगर पद्म पुरस्कारों के लिए यह मानक है तो गोविंद चामी, अमीरुल इस्लाम (दोनों दो महिलाओं के मर्डर के आरोपी) और मरियम रशीदा (नांबी नारायणन के साथ जासूसी मामले में आरोपी) जैसे लोगों को अगले साल पद्म पुरस्कार जरूर मिलेंगे।’’

नांबी ने पुरस्कार मिलने पर जताई थी खुशी : इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन (77) ने पद्म पुरस्कार से सम्मानित होने पर खुश जताई थी। उन्होंने शनिवार को कहा था, ‘‘भारतीय अंतरिक्ष के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए काम को आखिरकार मान्यता मिल ही गई। जासूसी के आरोपों से मेरा नाम प्रसिद्ध हो गया था, लेकिन अब खुशी है कि सरकार ने मेरे काम को मान्यता दे दी।’’

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