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जनता को रोटी नहीं दे सकते तो रामायण, महाभारत दिखाओ- पूर्व जज का मोदी सरकार पर तंज

इस ट्वीट के बाद कई यूजर्स ने जस्टिस काटजू को निशाने पर भी लिया है।

Markandey Katjuट्वीट के बाद जस्टिस काटजू सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने एक ट्वीट के जरिए कथित तौर पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने गुरुवार (30 अप्रैल, 2020) को ट्वीट कर कहा, ‘रोमन सम्राट कहा करते थे कि अगर आप लोगों को रोटी नहीं दे सकते तो उन्हें सर्कस दे दो। वहीं हमारे आधुनिक भारतीय सम्राट कहते हैं कि अगर आप लोगों को रोटी नहीं दे सकते तो उन्हें दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत दिखा दो। हरि ओम!!!’

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दरअसल देश में घातक कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 24 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लगाने की घोषणा की, जिसे बाद में बढ़ाकर तीन मई तक कर दिया। इसके अलावा लोग अपने घरों से बाहर ना निकलें, इसके लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय ने दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत फिर दिखाने की घोषणा की। लॉकडाउन के बीच खुद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने ट्वीट कर कहा था कि वो घर पर रामायण देख रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया में बुरी तरह ट्रोल होने के बाद उन्होंने ट्वीट हटा लिया था।

दूसरी तरफ कोरोना वायरस के प्रकोप और लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों की आजिविका बुरी तरह प्रभावित हुई। लॉकडाउन के बीच हजारों लाखों लोग दूसरे राज्यों में तरह फंसे हैं। रोजगार ना होने के चलते सैकड़ों ऐसे वीडियो भी सामने आए जिसमें लोगों ने बंदी के बीच राशन ना होने की बात कही। हालांकि विभिन्न राज्यों सरकारों ने दावा किया कि उनके यहां प्रवासी मजदूरों के राशन का इंतजाम किया गया है। आश्रय गृह की व्यवस्था भी कई गई। मगर सरकार की बहुत कोशिशों के बावजूद लोग पैदल ही अपने घरों की तरफ निकल पड़े हैं। इसके अलावा लॉकडाउन से भारत में उद्योग जगत भी बुरी तरह प्रभावति हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन के पहले 21 दिनों में देश में रिकॉर्ड 9-10 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

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संभवत: मौजूदा समय में देश की आर्थिक स्थिति और मजदूर तबके की खराब हालत पर जस्टिस काटजू ने इस ट्वीट के जरिए सरकार पर निशाना साधा है। हालांकि इस ट्वीट के बाद कई यूजर्स ने उन्हें निशाने पर भी लिया है। डॉक्टर पवन सिन्हा @ShriguruPawanji लिखते हैं, ‘जैसे जजों के पास छुट्टियां होती हैं। यह कठिन समय में मनोवैज्ञानिक उपचार की जरूरत के लिए ही हैं।’ दिनेश निषाद @dinesh_3007 लिखते हैं, ‘दूरदर्शन पर और भी पुराने नाटकों का प्रसारण हो रहा है। मगर इन्हें सिर्फ महाभारत और रामायण से समस्या है।’

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ऐसे ही भारतीय हिंदू @wisernova नाम से एक यूजर लिखते हैं, ‘मुझे लगा कि जज बनने के लिए सामान्य ज्ञान अनिवार्य है। लगता है कि मैं गलत था।’ पंकज @prkgarg लिखते हैं, ‘सर आपको पेंशन समय से मिल रही है, थोड़ा शांत हो जाओ।’ तरुण @tarunsach1 लिखते हैं, ‘आपने फिर निराश किया। पूछने के लिए क्षमा करें, मगर क्या आप अपनी उम्र के साथ पागल हो रहे हैं या ऐसी टिप्पणियां आसाइन किए गए कार्य या एजेंडे का हिस्सा हैं?’

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