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बंगले का अवैध निर्माण बचाने सुप्रीम कोर्ट गए थे गुजरात के बर्खास्‍त आईपीएस संजीव भट्ट, हारे

सुप्रीम कोर्ट ने आज अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन को संजीव भट्ट के बंगले में अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की अनुमति दे दी है। बता दें कि संजीव भट्ट के पड़ोसी प्रवीणचंद्र पटेल साल 2012 में संजीव भट्टे के बंगले के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट पहुंचे थे।

पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट। (file photo)

गुजरात पुलिस के बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट आज सुप्रीम कोर्ट में एक अपील हार गए हैं। दरअसल अपने बंगले में अवैध निर्माण बचाने के लिए संजीव भट्ट सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट से निराशा हाथ लगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन को संजीव भट्ट के बंगले में अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने संजीव भट्ट की अपील पर कहा कि “पहले आप हमारे पास आए थे, हमने आपको प्रोटेक्ट किया। अब हमने मामले का अध्धयन कर लिया है। बर्खास्त।”

बता दें कि संजीव भट्ट के पड़ोसी प्रवीणचंद्र पटेल साल 2012 में संजीव भट्टे के बंगले के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट पहुंचे थे। बता दें कि पूर्व आईपीएस अधिकारी के बंगले के पास ही प्रवीणचंद्र का एक प्लॉट है, जिसमें बंगले के अवैध निर्माण से परेशानी हो रही थी। इसके जवाब में संजीव भट्ट की पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिसे गुजरात हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके बाद संजीव भट्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें निराशा हाथ लगी है।

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पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने साल 2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित संलिप्तता का आरोप लगाया था। गुजरात दंगों के दौरान करीब 1000 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पीएम मोदी को गुजरात दंगों के मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी। साल 2011 में संजीव भट्ट को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में साल 2015 में उन्हें उनके पद से ही हटा दिया गया।

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