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बेटे ने दी थी तिहाड़ में बंद हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के 12वीं पास करने की गलत जानकारी, NIOS ने हटाया झूठ से पर्दा

एनआईओएस चेयरमैन के सीबी शर्मा ने कहा, "न तो क्लास 10वीं और न हीं 12वीं क्लास के रिजल्ट अभी तक घोषित हुए हैं। एनआईओएस के अधिकारियों ने कहा कि जून में परीक्षा के परिणाम आने की संभावना है।
Author चंडीगढ़ | May 20, 2017 18:03 pm
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला। (एजेंसी फाइल फोटो)

सुखबीर सिवाच

टीचर भर्ती घोटाले में दोषी पाए जाने पर 10 साल जेल की सजा काट रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के 12वीं पास करने को लेकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) की ओर स्पष्टीकरण दिया गया है। एनआईओएस की ओर से बताया गया कि चौटाला ने 12वीं की नहीं बल्कि 10वीं की परीक्षा दी है। चौटाला के बेटे अभय सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को 16 मई को बताया था कि उनके पिता ने एनआईओएस बोर्ड से क्लास 12वीं की परीक्षा फर्स्ट क्लास में पास की है। एनआईओएस की ओर से दी गई जानकारी के बाद जब शुक्रवार को अभय सिंह चौटाला से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे रिजल्ट के बारे में जानकारी नहीं थी। मैंने सिर्फ उतना बताया, जितनी मुझे पता था।

एनआईओएस चेयरमैन के सीबी शर्मा ने कहा, “न तो क्लास 10वीं और न हीं 12वीं क्लास के रिजल्ट अभी तक घोषित हुए हैं। एनआईओएस के अधिकारियों ने कहा कि जून में परीक्षा के परिणाम आने की संभावना है। इंडियन एक्सप्रेस ने चौटाला के दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि चौटाला ने क्लास 10वीं की परीक्षा सोशल साइंस, साइंस, टेक्नोलॉजी, हिंदी, भारतीय संस्कृति तथा हेरिटेज और बिजनेस स्टडीज सब्जेक्ट में परीक्षा दी। उन्होंने हिंदी माध्यम में परीक्षा दी है। चौटाला ने दिल्ली के तिहाड़ जेल से अप्रैल 6 से अप्रैल 24 के बीच एग्जाम दिया।

अभय चौटाला ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “उनके पिता की आखिरी परीक्षा 23 अप्रैल को थी। उस समय वो पैरोल पर रिहा थे। चूंकि परीक्षा केंद्र जेल के अंदर था इसलिए उन्हें परीक्षा देने के लिए जेल में जाना पड़ा।”अभय सिंह चौटाला ने बताया, “हाल ही में आए रिजल्ट में उन्हें ए ग्रेड (प्रथम श्रेणी) मिली है। उन्होंने अपनी सजा का सार्थक उपयोग करने का सोचा। वो जेल के पुस्तकालय में नियमित तौर पर जाते हैं। वो वहां अखबार और किताबें पढ़ते हैं। वो जेलकर्मियों से अपनी पसंदीदा किताबें मंगवाते हैं। वो पूरी दुनिया के महान नेताओं के जीवन पर आधारित किताबें पढ़ते हैं। कई बार वो हम लोगों से भी किताबें भेजने को कहते हैं।”

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