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सारस की गिनती में धनौरी अव्वल, वन विभाग ने यूपी सरकार को भेजा पूर्ण वेटलैंड का प्रस्ताव

धनौरी में सबसे ज्यादा 80 वयस्क व 8 बच्चे यानी कुल 88 सारस मिले। सिकंद्राबाद रेंज के रवानी बुजुर्ग में 12 वयस्क और 2 बच्चे व पारसौल में 13 वयस्क सारस मिले हैं। सभी जगहों में कुल 134 सारस जिले में चिह्नित हुए हैं।

धनौरी जिले में सबसे ज्यादा यानी कुल 88 सारस मिले हैं, जिलमें 80 वयस्क व 8 बच्चे हैं।

धनौरी को पूरी तरह वेटलैंड (आर्द्रभूमि) बनाने के लिए वन विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा है। धनौरी जिले में सबसे ज्यादा यानी कुल 88 सारस मिले हैं, जिलमें 80 वयस्क व 8 बच्चे हैं। दूसरी तरफ, नवंबर-दिसंबर के महीने में पहुंचने वाले प्रवासी पक्षियों ने इस बार सितंबर में ही दस्तक दे दी है। इससे पक्षी प्रेमियों ने ओखला पक्षी विहार में इस बार प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ने और नई व विलुप्त होती जा रही प्रजातियों के पक्षियों के दिखने की उम्मीद जताई है।

धनौरी में राजकीय पक्षी सारस की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी के कारण वन विभाग ने इसे पूर्ण वेटलैंड घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। सारस को किसानों को दोस्त माना जाता है। वन्यजीव अभयारण्य घोषित होने से सासरों की संख्या बढ़ाने में धनौरी की भूमिका बढ़ जाएगी। सारस के अलावा अन्य प्रजातियों के पक्षी भी धनौरी पहुंच रहे हैं। वन विभाग ने 15-16 सितंबर को जिले के चिह्नित वेटलैंड में सारस पक्षियों की गणना की थी। गणना के अनुसार खोदना खुर्द दादरी रेंज में कुल 6 सारस मिले, जिसमें 4 वयस्क और 2 बच्चे हैं। ईशेपुर सिकंद्राबाद रेंज में सारसों की संख्या 13 मिली, जिसमें 10 वयस्क और 3 बच्चे हैं।

धनौरी में सबसे ज्यादा 80 वयस्क व 8 बच्चे यानी कुल 88 सारस मिले। सिकंद्राबाद रेंज के रवानी बुजुर्ग में 12 वयस्क और 2 बच्चे व पारसौल में 13 वयस्क सारस मिले हैं। सभी जगहों में कुल 134 सारस जिले में चिह्नित हुए हैं। धनौरी में सारसों की संख्या सबसे ज्यादा मिलने के बाद पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की मांग की थी, जिसके कारण वन विभाग ने धनौरी को पूर्ण वेटलैंड घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। जानकारों का मानना है कि वेटलैंड घोषित होने के बाद धनौरी में सारस समेत अन्य पक्षियों की सुरक्षा व अन्य संसाधनों का ज्यादा बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। अभी सड़कों पर आने और तस्करों की वजह से इनकी मौत हो जाती है।

वहीं, ओखला पक्षी विहार में अभी से प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट गूंजने लगी है। करीब दो महीने पहले ही प्रवासी पक्षियों के यहां पहुंचने से इस बार इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है। सितंबर में पक्षी विहार में मार्श हेरियर, गुल बील टर्न, कॉम्बडक, कॉमन टील, पील एवोकेट, ग्रेलेस गूस, ब्लेक रेड स्टार्ट आदि को देखा गया है। कॉमन टील झुंड में अपना बसेरा किए हुए हैं। पक्षियों के लिए भोजन व कृत्रिम स्थान बनाने की तैयारी है ताकि ये पक्षी प्रवास और सहवास के दौरान खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

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