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तीन महीने बाद मिला पति का शव, सऊदी अरब में मौत के बाद दफना दिया गया था हिंदू शख्स

अदालत को बताया गया कि संजीव कुमार की अस्थियों के अवशेषों को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में लेकर आया जा रहा है। दरअसल कुछ दिन पहले संजीव कुमार की पत्नी अंजू शर्मा ने पहले सऊदी अरब से शव वापस लाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

सउदी अरब से भारत पहुुंची हिंदू ट्रक ड्राइवर की अस्थियां।, उसे मुसलमान समझ कर दफना दिया गया था। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

विदेश मंत्रालय ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि आज सुबह उस भारतीय नागरिक के  शव की अस्थियाँ मिल गई है, जिसकी जनवरी में सऊदी अरब में मृत्यु हो गई थी। उसे हिंदू होने के बावजूद और उसके परिवार की सहमति के बिना वहां दफना दिया गया था। अदालत को बताया गया कि संजीव कुमार की अस्थियों के अवशेषों को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में लेकर आया जा रहा है। दरअसल कुछ दिन पहले संजीव कुमार की पत्नी अंजू शर्मा ने पहले सऊदी अरब से शव वापस लाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि उसके पति का शव इसलिए कब्र में दफना दिया गया, क्योंकि अनुवादक ने गलती से मृतक का धर्म मुस्लिम बता दिया था।

आपको बता दें कि संजीव कुमार पिछले 23 सालों से सऊदी अरब में ट्रक ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था और जनवरी में कार्डियक अरेस्ट के कारण उसकी मौत हो गई। उनकी मृत्यु के बाद अस्थियों के अवशेषों को बाझ जनरल अस्पताल, जीजान में रखा गया था। विदेश मंत्रालय के वाणिज्य, पासपोर्ट और वीजा प्रभाग के निदेशक, विष्णु कुमार शर्मा ने पिछले महीने अदालत को सूचित किया था कि उन्होंने कुमार के शरीर को भारत वापस लाने के लिए राजनयिक प्रयास शुरू कर दिए हैं । भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा जीजान क्षेत्र में कानूनी कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। एमईए के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार की सुबह शव मिला है।

न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने अधिकारियों द्वारा कुमार अस्थि को भारत में लेन के  लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि, यह अदालत के लिए भी बहुत राहत की बात है।

भारतीय वाणिज्य दूतावास अदालत को यह भी बताया गया किआमतौर पर एक भारतीय नागरिक की मृत्यु के बारे में सूचित किया जाता है और शव को दफनाया नहीं जाता है जब तक कि वाणिज्य दूतावास द्वारा एक एनओसी जारी नहीं की जाती है। अधिकारियों ने अदालत से कहा कि, हालांकि, COVID-19 प्रोटोकॉल के कारण कुमार के शव को भारतीय वाणिज्य दूतावास को बताए बिना दफनाया गया था।

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