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इटली की इस महिला ने बिहार में बनवाया जानवरों के लिए कब्रिस्तान और अस्पताल, जानें वजह

बिहार में जानवरों के लिए एक ऐसा कब्रिस्तान है जिसे इटली की एक महिला ने बनवाया है। विदेशी महिला ने लावारिस जानवरों के लिए कब्रिस्तान के साथ ही एक अस्पताल भी बनवाया है।

प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

इटली की महिला ने बिहार में एक कब्रिस्तान बनवाया है जिसमें जानवरों को दफनाया जाता है और साथ ही लावारिस जानवरों का इलाज किया जाता है। यह कब्रिस्तान और अस्पताल करीब 7200 वर्ग फीट के इलाके में बना है। बता दें कि विदेशी महिला 1982 में इटली से बिहार घूमने आईं थीं। जिसके बाद कुछ ऐसा हुआ की महिला ने लावारिस जानवरों को लिए कुछ करने का फैसला किया।

कौन है विदेशी महिला: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इटली की महिला का नाम एड्रियाना फ्रेंटी है। एड्रियाना 1982 में इटली से बोधगया घूमने आईं थी। बोधगया में एड्रियाना ने बौध धर्म अपना लिया और यहीं बस गईं। कुछ साल बाद उन्होंने देखा कि एक लावारिस कुत्ते का शव नदी में फेंका जा रहा है। ये देख उन्होंने लावारिस जानवरों के इलाज और उनके दफनाने की सही व्यवस्था करने की ठानी। एड्रियाना ने धंधवा गांव के रास्ते में जमीन खरीदी और जानवरों के लिए अस्पताल खोला।

दफनाए जा चुके हैं करीब 3 हजार जानवर: रिपोर्ट के मुताबिक यह कब्रिस्तान 1992 से बना है और अब तक यहां करीब 3 हजार जानवर दफनाए जा चुके हैं। वहीं दफन करने के बाद वहां जानवरों की पहचान के लिए एक तख्ती भी लगाई जाती है, जिसमें उनके कब्रिस्तान में लाए जाने की तारीख लिखी होती है। बता दें कि पिछले करीब 26-27 सालों में यहां गाय, कुत्ता, बकरी, मुर्गी, मछली, कछुआ और खरगोश सहित कई जानवर अब तक दफनाए जा चुके हैं।

दफनाए जाने की होती है प्रक्रिया: बता दें कि जानवरों को दफनाए जाने की एक प्रक्रिया का यहां पालन होता है। सबसे पहले पाली भाषा में लिखे मंत्र के कागज और भगवान बुद्ध को चढ़ाए गए चीवर से ढका जाता है। शव को कंधे पर लेकर संस्था में बने बौद्ध स्तूप की तीन- पांच परिक्रमा लगाई जाती है।

 

इलाज के लिए शहर से भी लाते हैं जानवर: एड्रियाना की संस्था के कर्मचारी शहर व गांवों से लावारिस बीमार जानवरों को लाते हैं। यहां उन्हें संस्था के अस्पताल में रखकर इलाज किया जाता है। वहीं जरुरत पड़ने पर कुशल चिकित्सकों के द्वारा पशुओं का ऑपरेशन भी किया जाता है। इसके बाद ठीक होने तक उन्हें संस्था में ही रखा जाता है और बाद में उसे उसके इलाके में ही छोड़ दिया जाता है। वहीं अगर किसी पशु की इलाज के दौरान मौत हो जाती है तो उसे वहीं कब्रिस्तान में दफना दिया जाता है।

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