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चारा घोटाला: लालू यादव से जुड़े चौथे केस में कुछ देर में फैसला

यह मामला दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 13.13 करोड़ रुपए फर्जी तरीके से निकालने का है। सीबीआई की विशेष अदालत आज इस मामले में फैसला सुनाएगी। फैसले के लिए लालू प्रसाद यादव कोर्ट पहुंच चुके हैं।

चारा घोटाले के दुमका कोषागार मामले में आया फैसला। (image source- PTI)

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चारा घोटाले में आरोपी लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आज घोटाले के चौथे दुमका कोषागार अवैध निकासी मामले में फैसला आना है। जिसमें लालू प्रसाद यादव के साथ ही जगन्नाथ मिश्र समेत 31 लोग आरोपी हैं। यह मामला दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 13.13 करोड़ रुपए फर्जी तरीके से निकालने का है। सीबीआई की विशेष अदालत आज इस मामले में फैसला सुनाएगी। फैसले के लिए लालू प्रसाद यादव कोर्ट पहुंच चुके हैं।

कुल 6 मामलों में हैं लालू यादव आरोपीः बता दें कि चारा घोटाले में लालू यादव कुल 6 मामलों में दोषी हैं। जिनमें से तीन मामलों में लालू यादव को दोषी करार देते हुए सजा सुनायी जा चुकी हैं। पहले मामले में लालू यादव को साल 2013 में 5 साल की सजा सुनायी गई थी। उसके बाद दूसरे मामले में 23 दिसंबर, 2017 को लालू यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनायी गई थी। तीसरे मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने 24 जनवरी, 2018 को दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनायी थी। आज इस बहुचर्चित घोटाले के चौथे मामले में सजा का ऐलान होना है। लालू यादव फिलहाल रांची की बिरसा मुंडा जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। आज फैसला आने के बाद लालू यादव को इस घोटाले से जुड़े पटना और रांची मामले में भी सुनवाई का सामना करना है।

महालेखाकार को भी आरोपी बनाने की अपीलः राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अदालत में एक आवेदन दाखिल करते हुए अपील की है कि तत्कालीन महालेखाकार पीके मुखोपाध्याय को भी इस मामले में आरोपी बनाया जाए। लालू का कहना है कि चारा घोटाले को आगे बढ़ाने में महालेखाकार भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि वर्ष 1991 से लेकर 1995-96 तक की कैग रिपोर्ट में पशुपालन विभाग में हुई अवैध निकासी की चर्चा तक नहीं की गई थी। कोर्ट इस मामले पर भी आज ही सुनवाई कर सकती है।

क्या है दुमका कोषागार मामलाः दिसंबर 1995 से लेकर जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 13.13 करोड़ रुपए फर्जी तरीके से निकाल लिए गए थे। इस मामले में 11 अप्रैल, 1996 में सीबीआई ने लालू यादव समेत 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मामले में पहली चार्जशीट 11 मई, 2000 को दायर की गई थी।  

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