उत्तर प्रदेश के 35 जिले इस सीजन बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसमें से 23 जिले अब भी बाढ़ के चपेट में हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है, जिनमें से 3,042 लोगों को बुधवार को बचाया गया। बारिश से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई है। प्रतापगढ़ में 18 महीने का प्रियांश और अमरोहा के गजरौला में 32 साल के शेरा और 55 साल के सुरेश की मौत हो गई।

चित्रकूट में स्थिति बदतर

अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ज़िले में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश की सीमा से लगे इस ज़िले में मंदाकिनी नदी का जलस्तर 129.2 मीटर दर्ज किया गया।

जानकारी के मुताबिक ज़िले के 36 गांवों में 14,000 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें से 19 गांव कर्वी तहसील में, 10 गांव मानिकपुर में और सात गांव राजापुर तहसील में हैं। कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों और दुकानों में घुस गया है, जिससे लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जिन जगहों पर सड़कें डूब गई हैं और गाड़ियां नहीं चल पा रही हैं, वहां लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कौन से जिले बाढ़ से प्रभावित?

राज्य सरकार ने एक बयान में कहा कि फिलहाल अयोध्या, आजमगढ़, बलिया, बाराबंकी, बदायूं, चंदौली, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हापुड़, हरदोई, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव और वाराणसी समेत 23 जिलों में हालात खराब हैं। बयान के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 1,528 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है और राहत कार्यों के लिए सैकड़ों नौकाएं, बाढ़ चौकियां और मेडिकल टीम तैनात की गई हैं।

अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार को कुल 742 बाढ़ चौकियां, 452 नावें और मोटरबोट तथा 225 मेडिकल टीम काम कर रही थीं, जबकि 105 राहत शिविरों में 2,460 लोग रह रहे थे। चित्रकूट से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने पहाड़ी थानाक्षेत्र के चौरा गांव में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से फंसे करीब 150 लोगों को बचाया। पीएसी की बाढ़-राहत प्लाटून ने स्थानीय प्रशासन की मदद से मोटरबोट का इस्तेमाल किया और लोगों को भोजन, राहत सामग्री तथा चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

बलिया सबसे प्रभावित

बलिया उत्तर प्रदेश में बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां गंगा और सरयू का जलस्तर बढ़ने से सदर, बैरिया एवं बांसडीह तहसीलों के गांवों और शहरी इलाकों में लगभग 20,500 लोग प्रभावित हुए हैं। बलिया जिला प्रशासन ने 6,500 राशन किट, 33,843 दवा किट और पके हुए भोजन के 83,092 पैकेट बांटे हैं। पीलीभीत में भारी बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद शारदा, देओहा एवं खकरा नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बनबसा बैराज से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से ज़्यादा पानी छोड़ा गया, जबकि नानक सागर बांध से देओहा नदी में 30 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया।

लखीमपुर खीरी में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने मोहना नदी के गिरजा बैराज एफ्लक्स बांध पर बाढ़ और कटान-रोधी कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इंजीनियरों को चौबीसों घंटे काम करने का निर्देश दिया और पानी में डूबे इलाके में मौजूद लगभग एक दर्जन घरों के निवासियों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का आदेश दिया। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने बताया कि मौसम विभाग ने चार सितंबर तक भारी बारिश और बिजली गिरने को लेकर ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे बेवजह यात्रा न करें, जर्जर इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों या तारों से दूर रहें और खराब मौसम के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर ही रखें।

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भाजपा के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा बयान दिया है। 2027 में मुख्यमंत्री के चेहरे के सवाल पर केशव प्रसाद मौर्य ने सीधा जवाब देते हुए कहा, “जब तक कोई नया चेहरा नहीं आ जाता, मुख्यमंत्री का चेहरा योगी आदित्यनाथ ही हैं।” पढ़ें पूरी खबर