Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। गंगा, पुनपुन, दरधा, गंडक, कोसी समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि से निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में पानी फैल गया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक गंगा समेत आठ प्रमुख नदियां उफान पर हैं और पटना सहित राज्य के 16 जिलों में बाढ़ का असर सामने आया है।

कई स्थानों पर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर पानी बहने से आवागमन बाधित हो गया है। प्रभावित परिवार ऊंचे स्थानों, स्कूलों, सड़कों और सामुदायिक भवनों में शरण लेने को मजबूर हैं। फिलहाल प्रशासन उनको सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए जुटा हुआ है।

दीघाघाट, गांधीघाट और हाथीदह में गंगा खतरे के निशान से ऊपर

पटना में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। केंद्रीय जल आयोग के 4 सितंबर सुबह छह बजे के आंकड़ों के अनुसार दीघाघाट पर गंगा 51.68 मीटर, गांधीघाट पर 50.36 मीटर और हाथीदह में 43.24 मीटर दर्ज की गई। दीघाघाट, गांधीघाट और हाथीदह तीनों स्थानों पर नदी खतरे के निशान से ऊपर है। कोल्हाचक में गंगा का जलस्तर 56.10 मीटर दर्ज हुआ, जो वहां के उच्चतम बाढ़ स्तर से भी ऊपर है। बिहार के रियल-टाइम फ्लड मॉनिटरिंग सिस्टम के मुताबिक हाथीदह में पानी उच्चतम बाढ़ स्तर से करीब 30 सेंटीमीटर नीचे है और बढ़ रहा है।

गंगा के साथ पुनपुन और दरधा ने भी पटना जिले में दबाव बढ़ा दिया है। पुनपुन श्रीपालपुर में खतरे के निशान से 2.29 मीटर ऊपर दर्ज की गई है। धनरुआ प्रखंड में दरधा नदी के तेज बहाव के कारण बीर के महुआतड़ के पास करीब 25 फीट तटबंध टूट गया। इससे लगभग 30 घरों में पानी घुस गया और बड़ी मात्रा में धान की फसल डूब गई। ग्रामीणों ने रात में तटबंध पर शरण ली। प्रशासन की ओर से मिट्टी और बालू की बोरियों से कटाव रोकने की कोशिश की जा रही है।

पटना शहर के कई निचले इलाकों में भी पानी भरा

पटना शहर में भी बाढ़ का असर निचले इलाकों तक पहुंच चुका है। दीघा से दीदारगंज तक नदी किनारे के कई हिस्सों में पानी घुसने की सूचना है। दीघा के बिंद टोली में करीब 1,500 लोग विस्थापित हुए हैं। गौरीचक के आसपास करीब तीन दर्जन गांव पानी से घिरे हैं और कई संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। शहर को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील स्थलों की लगातार निगरानी की जा रही है।

बक्सर में भी गंगा लगातार बढ़ रही है। नैनीजोर पंचायत के ढाबी और गजाधर डेरा में पानी पहुंच चुका है, जबकि सजीवन डेरा चारों तरफ से घिर गया है। कई गांवों के रास्ते जलमग्न हैं। भोजपुर में बाढ़ का दायरा बढ़कर छह प्रखंडों तक पहुंच गया है और करीब 40 ग्राम पंचायतें प्रभावित बताई गई हैं। आरा-बक्सर पुराने हाईवे और मझउआ हवाई अड्डा मार्ग के कुछ हिस्सों पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। सुरक्षा कारणों से लगातार दूसरे दिन 62 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखे गए।

भागलपुर में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के बीच राघोपुर-काजीकोरैया बांध सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। कटाव और अंडरमाइनिंग से क्षतिग्रस्त बांध का ब्रीच करीब 400 मीटर तक पहुंच गया है। इसे बचाने के लिए 2,800 मेगा जियोबैग और 1.25 लाख बालू भरी बोरियां उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि दो लाख अतिरिक्त बोरियां आसपास के प्रमंडलों से मंगाई जा रही हैं। बचाव कार्य के दौरान रेलवे लाइन की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए बड़ी चिंता है।

बेगूसराय में तटबंधों के रिसाव और कमजोर स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं, छपरा में सरयू, गंगा, गंडक और सोन के बढ़ते जलस्तर से सदर प्रखंड की पांच पंचायतों में पानी तेजी से फैल रहा है। पश्चिम चंपारण के योगापट्टी और मधुबनी प्रखंड के कई गांव भी बाढ़ से घिरे हैं। गंडक हाजीपुर और लालगंज में खतरे के निशान से ऊपर है।

बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने पटना, नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के जिलाधिकारियों को जरूरी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद लेने, नाव और अन्य संसाधन तैयार रखने तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। नदी, घाट और तटबंधों से दूर रहने तथा स्नान, तैराकी, सेल्फी और नौकायन से बचने की अपील की गई है।

मौसम की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। मौसम विभाग ने 4 सितंबर को बिहार में भारी बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में नदियों के जलस्तर में और वृद्धि का खतरा बना हुआ है। जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार पटना के गांधीघाट और हाथीदह में गंगा का जलस्तर उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने की आशंका जताई गई थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति की समीक्षा की है और 4 सितंबर को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने का कार्यक्रम है।

यह भी पढ़ें: बाढ़ का पानी उतर गया, अब पुनर्वास की बड़ी चुनौती, तबाही रोकने के लिए नए सिरे से सोचना होगा

नेपाल की आपदा से इतर भारत में बाढ़ इस साल भी असम, केरल, हिमाचल, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर आदि जगहों पर आफत बन कर आई। अब तक जो आकलन किया गया है, उसके मुताबिक सैकड़ों लोगों की जान गई है। हजारों की संख्या में मवेशी मारे गए हैं। लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है। लाखों परिवार प्रभावित हुए हैं। वहीं, सैकड़ों सड़कें, पुल, मकान और बाग-बगीचे पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक