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नए दुपहिया का 5 और नई कार का 3 साल का बीमा कवर अनिवार्य हुआ

वाहन बीमा कारोबार के जानकार बताते हैं कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मतलब सीधा दूसरे की सुरक्षा से जुड़ा है। कार से हुए हादसे में मृतक के परिजनों को क्षतिपूर्ति का भुगतान इसी मद से होता है। जबकि फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस से दुर्घटना में गाड़ी को होने वाले नुकसान की भरपाई होती है।

Author August 31, 2018 11:45 AM
एक सितंबर 2018 से शोरूम से खरीदी जाने वाली नई कार का तीन साल और दुपहिया खरीद पर 5 साल का शुरुआती बीमा अनिवार्य हो गया है।

वाहनों से सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में क्षतिपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए देश में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आइआरडीएआइ) ने नए नियम लागू कर दिए हैं। एक सितंबर 2018 से शोरूम से खरीदी जाने वाली नई कार का तीन साल और दुपहिया खरीद पर 5 साल का शुरुआती बीमा अनिवार्य हो गया है। इसका फौरी असर नए वाहन खरीदारों पर पड़ेगा जिन्हें पहले के मुकाबले एक साथ करीब 3-5 गुना बीमा शुल्क अदा करना पड़ेगा। बीमा शुल्क पर 18 फीसद जीएसटी भी देय होगा। हालांकि आइआरडीएआइ ने नए नियम थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के लिए अनिवार्य किए हैं। लेकिन फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस कितनी अवधि के लिए कराया जाए, यह खरीदार की मर्जी पर निर्भर होगा। नए वाहन के शोरूम से बाहर निकलने से पहले बीमा होना अनिवार्य है तभी उसका पंजीकरण होगा।

वाहन विशेषज्ञों के मुताबिक नए प्रावधान सड़कों पर होने वाले हादसों में क्षतिपूर्ति विवादों का तुरंत और सुलभ न्याय दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा। मसलन सड़क दुर्घटना में मौत होने पर मृतक को मिलने वाले क्षतिपूर्ति नई व्यवस्था से सुनिश्चित हो जाएगी। क्योंकि अभी तक नया वाहन खरीदने पर शुरुआती एक साल का बीमा अनिवार्य है। जानकार बताते हैं कि बीमा अवधि समाप्त होने के बाद करीबन 50-60 फीसद दुपहिया वाहन मालिक उनका नवीकरण नहीं कराते हैं। वहीं, कार का बीमा नवीकरण कराने वालों की संख्या भी काफी कम है। केवल जांच में चालान से डरने वाले ही नियमित वाहन बीमा को प्राथकिता देते हैं। बीमा रहित वाहन से होने वाली दुर्घटना में यदि किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तब मृतक के परिजनों को क्षतिपूर्ति मिलने में लंबी कानूनी प्रक्रिया झेलनी पड़ती है। अधिकांश ऐसे वाद सालों तक न्यायालयों में लंबित रहते हैं। लंबी पैरवी नहीं करने वाले काफी मामलों में क्षतिपूर्ति पीड़ितों को नहीं मिल पाती है। वहीं, इस व्यवस्था के लागू होने के बाद 3 से 5 सालों तक ऐसे हादसे होने पर पीड़ित परिवार को जल्द क्षतिपूर्ति मिलना सुश्चित हो जाएगा। साथ ही गाड़ी मालिक के बजाए किसी अन्य के चलाने पर दुर्घटना में मौत होने पर क्षतिपूर्ति की उलझन भी खत्म हो जाएगी। किसी के भी नाम गाड़ी पंजीकृत हो, मृतक के परिजनों को क्षतिपूर्ति का भुगतान बीमा कंपनी को करना होगा।

वाहन बीमा कारोबार के जानकार बताते हैं कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का मतलब सीधा दूसरे की सुरक्षा से जुड़ा है। कार से हुए हादसे में मृतक के परिजनों को क्षतिपूर्ति का भुगतान इसी मद से होता है। जबकि फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस से दुर्घटना में गाड़ी को होने वाले नुकसान की भरपाई होती है। चूंकि स्वयं की गाड़ी में दुर्घटना होने पर नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी से कराना मालिक का स्वविवेकाधिकार है, इसलिए इसे अनिवार्य नहीं किया गया है। जबकि सड़क पर चलने वाले तीसरे पक्ष की सुरक्षा या क्षतिपूर्ति को आइआरडीएआइ ने प्राथमिकता दी है। जानकार यह भी बताते हैं कि नए प्रावधान से दुपहिया वाहन बीमा करने वाली कंपनियों को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि दुपहिया वाहन से होने वाले हादसों में तीसरे पक्ष की मौत होने की कम संभावना होती है। जबकि निजी कार बीमा कंपनियों के लिए नए प्रावधान के फायदेमंद होने की उम्मीद कम है।

आइआरडीएआइ ने दुपहिया वाहनों के लिए 4 श्रेणी (75 सीसी से कम, 75-150 सीसी, 150-350 सीसी और 350 सीसी से ज्यादा) तय की हैं। वहीं, निजी कारों के लिए तीन वर्ग ( 1000 सीसी से कम, 1000-1500 सीसी और 1500 सीसी से ज्यादा) निर्धारित किए हैं। नोएडा के वाहन वितरकों ने नए प्रावधान को लागू करने की तैयारी कर ली है। बीमा कंपनियां भी अपने सॉफ्टवेयर समेत अन्य संसाधनों को नए प्रावधानों के अनुरूप आॅन लाइन अपडेट कर रहे हैं। हांलाकि इससे वाहन खरीदारों को 3 से 5 साल की बीमा राशि (जीएसटी सहित) का एकमुश्त भुगतान करने की व्यवस्था करनी पड़ेगी। 150 से 350 सीसी श्रेणी की मोटर साइकिल खरीदार को 4468 रुपए ज्यादा भुगतान करना होगा। वहीं 1500 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली कार खरीदार को मौजूदा के मुकाबले 16265 रुपए देने होंगे। नोएडा आॅटोमोबाइल्स डीलर वेलफेयर असोसिएशन के कोषाध्यक्ष और टीवीएस के वितरक अरविंद शोरेवाला ने बताया कि नए प्रावधान सड़क हादसों के पीड़ितों को उनका हक दिलाना सुनिश्चित करेंगे। बीमा कंपनियों को आइआरडीएआइ के नए नियमों का पालन करना होगा। भूतल परिवहन विभाग से नए वाहनों को पंजीकृत करने के जो निर्देश मिलेंगे, उसके आधार पर काम किया जाएगा- पी. गुरुप्रसाद, यातायात आयुक्त उप्र.

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