तेलंगाना के कामारेड्डी जिले के बांसवाड़ा के एक अस्पताल में पिछले दिनों 10 महिलाओं की सी-सेक्शन (C-section) सर्जरी हुई। सर्जरी के बाद इसमें से पांच महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। इन महिलाओं को निजामाबाद के सरकारी जनरल अस्पताल और फिर हैदराबाद के निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराना पड़ा।
राजस्थान से भी ऐसी ही खबर सामने आई थी, जहां सरकारी अस्पतालों में सी-सेक्शन सर्जरी कराने वाली कई महिलाओं को किडनी संबंधी परेशानी आई थी।
तेलंगाना सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है। महिलाओं को ऐसी परेशानी क्यों हुई इस बारे में द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बांसवाड़ा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एम. विजय भास्कर ने कहा कि कुल 10 सिजेरियन ऑपरेशन किए गए। इसमें 9 और 10 जुलाई को 5-5 ऑपरेशन किए गए।
डॉ. एम. विजय भास्कर ने बताया कि सर्जरी के बाद 9 जुलाई की देर रात को एक महिला का ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया और उसे निजामाबाद जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। 10 जुलाई की शाम को एक महिला ने सीने में दर्द की शिकायत की और उसे भी निजामाबाद अस्पताल रेफर करना पड़ा।
11 जुलाई को तीन और महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी रेफर किया गया। तीन महिलाओं को किडनी संबंधी परेशानियां थीं। इलाज के बाद दो महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार आया और उनकी डायलिसिस बंद कर दी गई।
अस्पताल ने बताया है कि एक महिला को जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया और दो महिलाएं अभी भी आईसीयू में हैं।
अस्पताल के मुताबिक, बाकी पांच महिलाओं को किसी भी तरह की कोई स्वास्थ्य परेशानी नहीं हुई। अस्पताल की ओर से बताया गया कि कुल 10 में से सात महिलाओं को टांके काटने के बाद छुट्टी दे दी गई। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से बनाई गई कमेटी महिलाओं को दी गई लिक्विड दवाइयों की जांच कर रही है।
अस्पताल ने कहा है कि महिलाओं का स्वास्थ्य किस वजह से खराब हुआ, यह पता नहीं चल पाया है लेकिन इस मामले में जांच की जा रही है।
विपक्ष ने कहा- मुआवजा दिया जाए
यह मामला तेलंगाना में राजनीतिक तूल पकड़ गया है। विपक्ष ने कहा है कि महिलाओं की गलत सर्जरी की गई और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। विपक्षी दल बीआरएस के नेता टी. हरीश राव ने कहा कि प्रभावित महिलाओं को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
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राजस्थान में पिछले सप्ताह आठ महिलाओं और एक नाबालिग की मौत ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है। पिछले दो महीनों में राजस्थान में मातृ मृत्यु दर के मामलों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
