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FTII: उधर अनुपम खेर के चेयरमैन बनने का हुआ एलान, इधर पांच छात्रों को मिला कैंपस छोड़ने का फरमान

बैठक का बहिष्कार करने वाले पांच छात्रों को संस्थान के डीन (फिल्म्स) से बुधवार को एक ई-मेल मिला है।
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआइआइ)

पुणे में भारतीय फिल्म एंड टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के पांच छात्रों को बुधवार को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। यह फैसला बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर के संस्थान के अध्यक्ष बनाए जाने के एलान के दिन आया। हालांकि, उनकी नियुक्ति का इस फैसले का कोई संबंध नहीं है। निकाले गए लड़कों ने संस्थान में फिल्म शूट करने की नई प्रक्रिया का बहिष्कार किया था। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था और शूटिंग मानदंडों को बदलने की मांग की। हाल ही में संस्थान ने तीन दिन की शूटिंग शेड्यूल को दो दिनों में निपटाने के लिए कहा था, जिस पर 2016 के बैच ने बहिष्कार किया था। उसी के पहले ग्रुप में से निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, साउंड डिजाइन, एडिटिंग और आर्ट डायरेक्शन के एक-एक छात्र को हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया है, जो महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए थे।

बैठक का बहिष्कार करने वाले इन पांच छात्रों को संस्थान के डीन (फिल्म्स) अमित त्यागी से बुधवार को एक ई-मेल मिला। उसमें कहा गया कि आपको प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने की सलाह दी गई, लेकिन आप नहीं आए। भविष्य में आपको इस एक्सरसाइज को करने के लिए मौका नहीं दिया जाएगा। डायलॉग एक्सरसाइज का आपने बहिष्कार किया, लिहाजा तीसरे सेमेस्टर में कैंपस में आपकी जरूरत नहीं है। यह पत्र मिलते ही तीन दिनों में हॉस्टल खाली करें और चौथे सेमेस्टर में वापस कैंपस आएं। नए शूटिंग मानदंड के मुताबिक, हर शूटिंग शिफ्ट आठ घंटों के बजाय 12 घंटों की होगी। छात्रों का कहना है कि इससे न केवल शूटिंग का वक्त बढ़ेगा बल्कि यह श्रम कानून का उल्लंघन होगा। छात्रों का आरोप है कि तीन दिनों के शेड्यूल को दो दिनों में पूरा करने का फैसला संस्थान ने लिया है, ताकि पाठ्यक्रम जल्द से जल्द पूरा हो सके। वह इस चक्कर में शिक्षा की गुणवत्ता का ख्याल भी नहीं कर रहे हैं।

एफटीआईआई स्टूडेंट इकाई के महासचिव रोहित कुमार ने बताया कि शूटिंग और प्री-प्रोडक्शन के लिए जो कामगार कॉन्ट्रैक्ट पर बाहर से आते हैं, उन्हें भी दिन में 12 घंटों तक काम करना पड़ेगा, जो इंडस्ट्री के मानदंडों से ऊपर है। फिल्म इंडस्ट्री में हर जगह आठ घंटे काम होता है। आर्ट डायरेक्शन के छात्रों के लिए भी नए मानदंड ठीक नहीं होंगे, जिससे उन्हें सीखने के लिए सीमित मौके मिलेंगे। उन्होंने आगे बताया कि संस्थान किसी भी हालत में जल्द से जल्द पाठ्यक्रम को निपटाना चाहता है।

 

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