दिल्ली दंगाः डीएनए रिपोर्ट का इंतजार तो कहीं डेथ सर्टिफिकेट में देरी, 5 महीने बाद भी सरकारी मदद के इंतजार में दंगा पीड़ित, 700 आवेदन हैं लंबित

दंगों में गुलजेब परवीन (21) ने अपने पति मोहसिन अली (23) को खो दिया तो इकरामुद्दीन के छोटे बेटे आकिब मारे गए, तब उनकी उम्र महज 19 साल थी।

Delhi riots 2020
दिल्ली दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी। (Express photo: Praveen Khanna)

पूर्वोत्तर दिल्ली में 23 से 26 फरवरी के बीच हुए सांप्रदायिक दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग बुरी तरह घायल हो गए थे। इन दंगों में गुलजेब परवीन (21) ने अपने पति मोहसिन अली (23) को खो दिया तो इकरामुद्दीन के छोटे बेटे आकिब मारे गए, तब उनकी उम्र महज 19 साल थी। हालांकि बाद में लोगों का ध्यान दंगों से महामारी की शिफ्ट हो गया जिसके चलते मोहसिन और आकिब सहित सैकड़ों परिवार दिल्ली सरकार द्वारा उन्हें मुआवजे मिलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आधिकारिक रिकॉर्ड के हवाले से एक वरिष्ठ अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जून के आखिर तक करीब 3200 लोगों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया है। इनमें से 1700 लोगों को मुआवजे की मंजूरी मिल गई है। 700 के करीब लंबित हैं और 900 से ज्यादा को नामंजूर कर दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि अभी तक विभिन्न श्रेणियों में राहत के रूप में बीस करोड़ रुपए से अधिक का वितरण किया जा चुका है।

रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि मौत की श्रेणी में सात मामलों में मुआवजा राशि बैंक खाते के विवरण का अभाव में जारी नहीं की गई है। तीन मामलों में डीएनए रिपोर्ट लंबित है और एक एफआईआर की अनुपस्थिति का मामला है। दो मामलों में दावेदार उपस्थित नहीं रहे हैं। प्रत्येक मामले में मृतकों के परिजनों को 9-9 लाख रुपए की राशि दी जानी है।

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मोहसिन के चाचा इमरान खान ने बताया कि हमारे मामले में मुआवजा राशि जारी नहीं की गई है क्योंकि अभी तक मोहसिन का मुत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है। क्राइम ब्रांच ने खजूरी खास पुलिस स्टेशन जाने के लिए कहा। पुलिस स्टेशन ने नोर्थ एमसीडी जाने के लिए कहा और वहां से हमें लोक नायक हॉस्पिटल जाने के लिए कहा गया। मोहसिन के पिता मृत्यु की कगार हैं। वो सोमवार को भी सरकारी कार्यालयों की चक्कर लगाते रहें। शुरुआत में हम उसकी डीएनए रिपोर्ट का इंतजार करते रहे जो अप्रैल में आई। मगर हम अब भी परेशानी का सामना कर रहे हैं। मोहसिन की मौत की जांच पर पुलिस प्रगति पर भी हमारे पर जानकारी नहीं है। उसकी पत्नी उम्मीद से हैं और वो हापुड़ वापस लौट गई हैं।

बता दें कि मोहसिन यूपी के हापुड़ में भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के एक पदाधिकारी थे। उन्हें खजूरी खास पुलिस स्टेशन से मुश्किल से चार सौ मीटर दूर और सीआरपीएफ कैंप से 200 मीटर की दूरी पर मार दिया गया था। एक डीजल जेनरेटर व्यापारी मोहसिन के परिवार का दावा है कि वो एक मैरिज हॉल के मालिक से मिलने के लिए वहां गए थे।

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इमरान के मुताबिक नोर्थ एमसीडी के अधिकारियों का कहना है कि मोहसिन के मृत्यु प्रमाण में देरी लॉकडाउन की वजह से हुई। इसके बिना, दिल्ली सरकार 9 लाख रुपए की राहत राशि जारी नहीं कर रही है।

इधर आकिब के पिता इकरामुद्दीन का कहना है कि वो मुझसे एक हजार रुपए लेकर 24 फरवरी को कपड़े खरीदने के लिए बाहर गया था। उन्होंने कहा कि हम भागीरिथी विहार में एक किराए के मकान में रहते हैं। अप्रैल में उसकी बहन की शादी होनी थी, इसलिए वो कपड़े खरीदने के लिए गया था। बाद में हमें पता चता है कि भजनपुरा पेट्रोल पंप के पास उसके सिर में चोटें आईं थीं। दो मार्च को इलाज के दौरान जीटीबी हॉस्पिटल में उसकी मौत हो गई।

इकरामुद्दीन जीविका के लिए चूड़ी बेचने का काम करते हैं। इस काम में उनका बेटा भी मदद करता था। वो कहते हैं कि पहले हमने आकिब को खो दिया और अब लॉकडाउन ने हमपर कयामत ढा दी। किराया देना भी मुश्किल हो रहा है।

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