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आतंकवाद के मोर्चे पर साथ आए पांच मध्य एशियाई देश

भारत की ओर से अपने वक्तव्य में सुषमा स्वराज ने कहा कि हम अफगानिस्तान के आर्थिक पुनर्निर्माण और युद्धग्रस्त क्षेत्र में अफगान नीत, अफगान स्वामित्व वाली एवं अफगान नियंत्रित शांति एवं सामंजस्य की समावेशी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Author January 14, 2019 10:13 AM
स्वराज ने कहा, ‘हमारा क्षेत्र आतंकवाद के गंभीर खतरों का सामना कर रहा है।

आतंकवाद के मोर्चे पर पांच मध्य एशियाई देशों ने भारत के एजंडे का समर्थन किया है। रविवार को समरकंद में आयोजित ‘भारत-दक्षिण एशिया संवाद’ की पहली बैठक के बाद जारी साझा घोषणापत्र में आतंकवाद के तमाम रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की गई और इससे निपटने के लिए सहयोग पर रजामंदी जताई गई। इस बैठक में अफगानिस्तान विशेष तौर पर शामिल हुआ। भारत की ओर से शामिल होने पहुंची विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने विस्तृत भाषण में अफगानिस्तान के आर्थिक पुनर्निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में सुषमा स्वराज के अलावा अफगानिस्तान, कजाखस्तान, किरगिज गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। यहां जारी संयुक्त बयान में कहा गया, ‘सभी पक्षों ने आतंकवाद की उसके तमाम रूपों तथा अभिव्यक्तियों में निंदा की और दुनिया के लोगों तथा अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरा बने आतंकवाद से निपटने में सहयोग करने पर रजामंदी जताई।’ बयान में भारत और मध्य एशिया के बीच प्राचीन सभ्यतागत, सांस्कृतिक, व्यापारिक और जनता के स्तर पर संपर्कों की चर्चा की गई और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय स्तर पर भारत और मध्य एशिया के बीच फलदायी दोस्ताना रिश्तों एवं परस्पर लाभदायक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता जताई गई। मंत्रियों ने क्षेत्रीय सहयोग, सामान एवं ऊर्जा के पारगमन के लिए एक अहम जमीनी संपर्क के रूप में भारत-मध्य एशिया संवाद में अफगानिस्तान की भागीदारी का स्वागत किया और अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता के प्रति मध्य एशियाई देशों और भारत के समर्थन के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

भारत की ओर से अपने वक्तव्य में सुषमा स्वराज ने कहा कि हम अफगानिस्तान के आर्थिक पुनर्निर्माण और युद्धग्रस्त क्षेत्र में अफगान नीत, अफगान स्वामित्व वाली एवं अफगान नियंत्रित शांति एवं सामंजस्य की समावेशी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। स्वराज ने कहा, ‘हमारा क्षेत्र आतंकवाद के गंभीर खतरों का सामना कर रहा है। भारत, मध्य एशिया और अफगानिस्तान ऐसे समाज हैं, जो सहिष्णु एवं मिश्रित हैं। आतंकवादी जिस नफरत की विचारधारा को प्रसारित करना चाहते हैं, उसकी हमारे समाज में कोई जगह नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘हमें यह भी पूछने की जरूरत है कि ये आतंकवादी कौन हैं, उनकी आर्थिक मदद कौन कर रहा है, उनका भरण-पोषण कैसे होता है, कौन उनका संरक्षण करता है और प्रायोजित करता है।’ भारत, अफगानिस्तान को पुनर्निर्माण, अवसंरचना विकास, क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास एवं संपर्क पर केंद्रित विकास कार्यों के लिए करीब तीन अरब डॉलर की आर्थिक मदद दे रहा है।

सुषमा ने कहा कि सितंबर 2017 में शुरू की गई ‘नई विकास साझेदारी’ के तहत काबुल शहर में शहतूत बांध पेयजल परियोजना, नंगरहार प्रांत में कम लागत का आवासन, 116 उच्चस्तरीय सामुदायिक विकास परियोजनाएं एवं अवसंरचना की कई अन्य परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत एवं मध्य एशियाई देशों के बीच इस विकासशील साझेदारी को आगे ले जाने के लिए भारत ने ‘भारत-मध्य एशिया विकास समूह’ के गठन का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने भारत, ईरान एवं अफगानिस्तान के संयुक्त प्रयास का उल्लेख किया, जिससे ईरान में चाबहार बंदरगाह बन पा रहा है। भारत-मध्य एशियाई संवाद में शामिल होने के लिए स्वराज शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर समरकंद पहुंचीं। रविवार को सुषमा स्वराज ने संवाद से इतर तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री रसित मेरेडो से मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत और तुर्कमेनिस्तान महत्त्वाकांक्षी टीएपीआइ (तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत) पाइपलाइन परियोजना का हिस्सा हैं।

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