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कांग्रेस की पहली ट्रांसजेंडर राष्ट्रीय महासचिव अप्सरा रेड्डी ने बताया अपना दर्द, पढ़िए- कैसा रहा उनका सफर

अप्सरा बताती हैं, 'बतौर ट्रांसवूमन मुझे सबसे ज्यादा दिक्कत एयरपोर्ट पर होती थी। पुरुषों की लाइन में लगाया जाता था और सुरक्षा जांच करने वाला गार्ड मेरे शरीर के हर हिस्से को छूता था।'

Author January 13, 2019 1:21 PM
सुष्मिता देव, राहुल गांधी और अप्सरा रेड्डी (फोटोः ANI)

अप्सरा रेड्डी को हाल ही में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था। इस पद पहुंचने वाली वे पहली ट्रांसजेंडर हैं। अप्सरा रेड्डी का जीवन संघर्ष की एक अलग ही कहानी बयां करता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने जीवन निजी, सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं पर काफी खुलकर बातचीत की। इनमें बतौर ट्रांसजेंडर (अधिकार संरक्षण) बिल, 2018 भी शामिल है।

अप्सरा ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया, ‘मेरा जन्म एक रुढ़िवादी दक्षिण भारतीय परिवार में हुआ था। मेरे पिता शराब के आदी थे, घर में कई तरह के विवाद थे। हालांकि मेरी मां काफी मजबूत थीं। मेरे जीवन की हर घटना और मुसीबत ने मुझे काफी प्रेरित किया।’

अप्सरा ने कहा, ‘मुझे अपनी लैंगिक पहचान से मां को अवगत कराने में भी कई तरह की मुसीबतें झेलनी पड़ीं। बेहद मुश्किल लगने वाली बातें भी हुईं। मुझे कभी भी गे की तरह नहीं पहचाना गया। बहुत जल्दी मुझे पता चल गया था कि मैं एक महिला हूं। मैं घर से भागना नहीं चाहती थी और अपने परिवार को समझाने के लिए तैयार थी कि वे मेरे बारे में कुछ नहीं जानते।’

अप्सरा के मुताबिक उनकी मां मान गईं लेकिन पिता और दूसरे रिश्तेदारों ने यह स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘मैं और मेरी मांग आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं थे और परिवार में ज्यादातर लोगों को मुझे मिल रहे मां के साथ से भी तकलीफ थी। मुझे याद है हमारे एक रिश्तेदार ने शादी का न्योता भेजा था लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसे (अप्सरा को) लेकर मत आना। इसके बाद में काफी बदल चुकी थी।’

अप्सरा का कहना है, ‘मैं एक अलग वर्ग से हूं। लेकिन मैं खुद को सिर्फ उसी वर्ग तक सीमित नहीं रखना चाहती। देश के नागरिक के तौर पर हर नीति मुझे प्रभावित करती है चाहे वह इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हो, स्वास्थ्य या टैक्स सिस्टम से जुड़ी हों। मैं महिलाओं, बच्चों और ट्रांसजेंडर्स को प्रभावित करने वाली नीतियों पर बड़ी चर्चाओं का हिस्सा बनना चाहती हूं। मुख्यधारा में आने का यही एक तरीका है।’

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव की अपनी नई भूमिका में वे वर्कशॉप्स और कॉन्फ्रेंस के जरिये महिलाओं तक पहुंचना चाहती हैं। इसमें उनका फोकस ट्रांसजेंडर महिलाओं पर भी रहेगा। अप्सरा कहती हैं, ‘मुझे एक नेता के तौर पर उनके बारे में सोचने और उन्हें सशक्त बनाने का मौका मिला है। मैं हर राज्य में महिला कांग्रेस की इकाई से जुड़कर वहां के लिए वर्कशॉप करूंगी ताकि उन्हें मताधिकार, रोजगार, जनता के बीच बात रखने आदि के बारे में समझाया जा सके।’

अप्सरा याद करते हुए कहती हैं, ‘बतौर ट्रांसवूमन मुझे हर जगह तकलीफ झेलनी पड़ती थी। लोग मेरे यू-ट्यूब वीडियो पर कमेंट में अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते थे। मुझे पासपोर्ट पर लैंगिक पहचान ठीक कराने में भी जद्दोजहद करनी पड़ी। आखिरकार मामला कोर्ट में जाकर सुलझा। सबसे ज्यादा दिक्कत एयरपोर्ट पर होती थी। मुझे पुरुषों की लाइन में लगाया जाता था और सुरक्षा जांच करने वाला गार्ड मेरे शरीर के हर हिस्से को छूता था।’ अप्सरा के मुताबिक इस मसले पर हर जगह बेहद संवेदनशीलता की जरूरत है।

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