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रोजगार के मुद्दे पर युवाओं का ‘पहला वोट’ करेगा चोट

देश में शिक्षा के मुद्दे पर तेजी से काम हुआ है लेकिन अभी और काम करना बाकी है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाली केंद्र सरकार शिक्षा के लिए अधिक बजट का प्रावधान करेगी।

first time voters, lok sabha, lok sabha elections, loksabha chunavLok Sabha Elections 2019: पिछले आम चुनावों के बाद 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा इस बार मतदान करेंगे। (Photo : Express Archive)

इस लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले अधिकतर युवा रोजगार के मुद्दे को अहम मानते हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए पहला वोट करेंगे। इसके अलावा शिक्षा, देश का विकास, अर्थव्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, धार्मिक सौहार्द आदि मुद्दे भी पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के लिए आवश्यक हैं। इस वर्ग के मतदाताओं का कहना है कि वे पार्टी से अधिक उम्मीदवार को देखकर अपना मत देंगे। इनका कहना है कि उनका सांसद दूरदर्शी, गैर आपराधिक पृष्ठभूमि, युवा, जनता के मुद्दों की समझ रखने वाला और जहां तक संभव हो स्थानीय होना चाहिए। डीयू के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) गणित की पढ़ाई कर रहे 18 वर्षीय राहुल चौहान ने बताया कि फिलहाल चुनाव प्रचार में चौकीदार, पाकिस्तान में वायु सेना की कार्रवाई और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दे ही छाए हुए हैं।

उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव प्रमुख रूप से बेरोगारी, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वे अपना पहला वोट किसी पार्टी को देखकर नहीं बल्कि बेहतर उम्मीदवार देखकर देंगे। उनके मुताबिक कोई स्थानीय नेता ही बेहतर सांसद बन सकता है क्योंकि उसे क्षेत्र और उसकी समस्याओं के बारे में पता होता है। इसलिए सांसद स्थानीय व्यक्ति ही होना चाहिए। इसके अलावा उसके ऊपर कोई आपराधिक मामला न हो, वह दूरदर्शी हो और उसमें नेतृत्व क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि देश में रोजगार की स्थिति सही नहीं है लेकिन कौशल विकास के माध्यम से कोशिशें जारी हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाली सरकार इस समस्या को हल करनी की पूरी कोशिश करेगी। डीयू के डॉ भीम राव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहीं 18 वर्षीय मुग्धा भाटी का कहना है कि अभी चुनाव प्रचार में आर्थिक मदद, पाक पर हमला और राम मंदिर जैसे मुद्दे ही छाए हुए हैं। उनके मुताबिक रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर चुनाव होने चाहिए। उनका कहना है कि हमें ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जहां लोगों को आर्थिक मदद की आवश्यकता ही न हो। मुग्धा ने कहा कि वो उम्मीदवार को देखकर अपना मत देंगी क्योंकि काम कोई पार्टी नहीं व्यक्ति करता है और जब सरकार बनती है तो उसमें भी पार्टी नहीं उम्मीदवार सहभागिता करता है। उन्होंने कहा कि उनका सांसद ऐसा हो जो अपने पूरे कार्यकाल में काम कराए और उस कार्य को जाकर मौके पर देखे भी। इसके अलावा वह लोगों की पहुंच में हो यानी अपने क्षेत्र के लोगों से आसानी से मिल जाए।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मनोविज्ञान ऑनर्स की पढ़ाई कर रहे 19 वर्षीय अहमद खान ने कहा कि चुनाव में बेरोजगारी, शिक्षा, देश की ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने और धार्मिक सौहार्द के मुद्दे होने चाहिए लेकिन अभी बात हो रही है पाक पर हमले की, मिशन शक्ति और राम मंदिर की। उन्होंने कहा कि मैं अपने यहां के उम्मीदवार और उसके गुणों को देखकर अपना पहला मत दूंगा क्योंकि हमें उससे ही अगले पांच सालों तक काम पड़ेगा। खान के मुताबिक उनका सांसद पढ़ा लिखा तो हो ही साथ ही वह समाज को बांटने की बात न करता हो। वह लोगों की बात सुनने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में रोजगार और शिक्षा की स्थिति सही नहीं है और आने वाली सरकार को इन दोनों मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। डीयू के रामानुजन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स कर रहे विकास मिश्रा का कहना है कि अभी लोग पुलवामा व उसके बाद हुए हमले, राष्ट्रवाद, मिशन शक्ति, ईवीएम, किसानों का लोन माफ करने आदि की बातें कर रहे हैं। उनके मुताबिक देश में चुनाव शिक्षा, रोजगार और विकास के मुद्दे पर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी को देखकर नहीं बल्कि प्रत्याशी को देखकर मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि मेरा सांसद समाज के कल्याण के लिए काम करने वाला होना चाहिए। इसके अलावा वह दूरदर्शी और युवा हो तो अधिक बेहतर होगा। विकास का कहना है कि देश में शिक्षा के मुद्दे पर तेजी से काम हुआ है लेकिन अभी और काम करना बाकी है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाली केंद्र सरकार शिक्षा के लिए अधिक बजट का प्रावधान करेगी।

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