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‘पहले पढ़ाई, फिर विदाई’: मंडप से सीधे परीक्षा केंद्र पर पहुंची दुल्हन, टीचर-स्टाफ ने उतारी आरती!

इसे महिला सशक्तीकरण की संज्ञा दी जाए या फिर शिक्षा हासिल करने की ललक। उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के कालीटोला गांव में बुधवार को सात फेरे लेने के बाद एक दुल्हन विदाई से इनकार कर दिया, जिससे घराती और बारातियों में अफरा-तफरी का माहौल हो गया।

Author बांदा | February 9, 2018 00:03 am
परीक्षा देने पहुंची दुल्हन

 

इसे महिला सशक्तीकरण की संज्ञा दी जाए या फिर शिक्षा हासिल करने की ललक। उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के कालीटोला गांव में बुधवार को सात फेरे लेने के बाद एक दुल्हन विदाई से इनकार कर दिया, जिससे घराती और बारातियों में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। लेकिन, कुछ ही देर बाद जब दोनों पक्षों को ‘न विदाई’ की वजह का पता चला तो खुशी से झूम उठे। ‘दुल्हन’ ने बोर्ड परीक्षा देने से पूर्व विदाई से इनकार कर दिया था। हुआ यह था कि बबेरू थाना क्षेत्र के काजीटोला गांव की युवती अर्चना यादव की शादी की रस्मे पूरी होने के बाद बुधवार को विदाई की तैयारी हो चुकी थी, अचानक दुल्हन ने अपनी ससुराल जाने से इनकार कर दिया। दुल्हन के इनकार करने से घराती और बाराती पक्ष में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब लड़की के पिता ने बताया कि बेटी की दूसरी पाली में बोर्ड परीक्षा है, वह परीक्षा देने के बाद ही ससुराल जाने को राजी है।

दोनों पक्षों के लोग खुशी से झूम उठे और दुल्हन विदाई वाली सजी-धजी कार में दूल्हे राजा अनूप (फतेहपुर) और भाई रजनीश व कुछ अन्य रिश्तेदारों के साथ परीक्षा केंद्र ज्वाला प्रसाद शर्मा इंटर कॉलेज बबेरू पहुंच गई। परीक्षा केंद्र व्यवस्थापक/प्रधानाचार्य डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ‘उन्हें जैसे ही परीक्षा केंद्र में ‘दुल्हन’ के आाने की सूचना मिली, वह समूचे स्टॉफ के साथ कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंचकर दुल्हन का स्वागत किया और उसे परीक्षा केंद्र तक ससम्मान पहुंचाने का काम किया।’

उन्होंने बताया कि ‘परीक्षार्थिनी दुल्हन ने व्यावसायिक विषय का पेपर देने के बाद अपने गांव लौटी और इसके बाद देर शाम विदा होकर अपनी ससुराल फतेहपुर जिले के खागा के लिए रवाना हुई।’ ससुराल जाने से पूर्व दुल्हन से जब पूछा गया तो उसने सिर्फ इतना कहा कि ‘पहले पढ़ाई, बाद में विदाई।’ इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) हफीजुर्रहमान ने कहा कि ‘यह सरकार की ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ नारे का असर है, सूखे बुंदेलखंड में अब लड़कियां सशक्त हो रही हैं।

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