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UP में धर्मांतरण कानून के बाद पहली FIR, आरोपी बना रहा था छात्रा पर धर्म बदलने का दबाव

प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 'उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020' को मंजूरी दे दी जिसमें जबरन या धोखे से धर्मांतरण कराए जाने और शादी करने पर दस वर्ष कैद और विभिन्न श्रेणी में 50 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

crime, crime news, love jihadप्रतीकात्मक तस्वीर।

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कानून को राज्यपाल आनंदी पटेल की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद प्रदेश के बरेली में एक शख्स के खिलाफ इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है शख्स एक युवती का धर्म परिवर्तन कराने के इरादे से उससे विवाह के झांसे में फंसा रहा था। धर्मांतरण कानून अमल में आने के बाद देश में ये संभवत: पहला मामला है।

प्रदेश पुलिस ने बताया कि युवती के पिता की शिकायत के बाद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। बरेली स्थित देवरानिया निवासी युवती के पिता ने शिकायत में बताया कि आरोपी अवैस अहमद ने बेटी की पढ़ाई के दौरान कथित तौर पर उससे दोस्ती की। अब वो बेटी का धर्म परिवर्तन कर उससे विवाह करने का दबाव बना रहा है।

पिता ने दावा कि अवैस अहमद ने विवाह के खिलाफ जाने पर परिवार के सदस्यों की जान लेने की धमकी भी दी। मामले में पुलिस नए कानून के तहत आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है। बता दें कि शनिवार को प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’ को मंजूरी दे दी जिसमें जबरन या धोखे से धर्मांतरण कराए जाने और शादी करने पर दस वर्ष कैद और विभिन्न श्रेणी में 50 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

यूपी शासन के प्रमुख सचिव (विधायी) अतुल श्रीवास्तव ने शनिवार को बताया कि राज्यपाल की मंजूरी के बाद ‘उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’ की अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की अध्यक्षता में पिछले मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी गई थी।

इसमें विवाह के लिए छल-कपट, प्रलोभन देने या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंहह ने मंगलवार को बताया था कि इस अध्यादेश के तहत ऐसे धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा जो छल-कपट, प्रलोभन, बलपूर्वक या गलत तरीके से प्रभाव डाल कर विवाह या किसी कपट रीति से एक धर्म से दूसरे धर्म में लाने के लिए किया जा रहा हो।

इसे गैर जमानती संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखने और उससे संबंधित मुकदमे को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की अदालत में विचारणीय बनाए जाने का प्रावधान किया जा रहा है। (एजेंसी इनपुट)

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