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दिल्ली में रोज लग रही सौ से ज्यादा जगहों पर आग

दिल्ली अग्निशमन विभाग के फायर अधिकारी प्रथम, अतुल गर्ग का कहना है कि इस मौसम में वतावरण में नमी समाप्त हो जाती है। इस कारण एक छोटी सी चिंगारी से लगी आग भीषण रूप धारण कर लेती है। ज्यादातर मौकों पर यही देखा गया है। वहीं, खाली स्थानों और कबाड़ के गोदामों में आग लगने की घटनाओं के पीछे लोगों की लापरवाही देखी गई है। लोग नियमों को ताक पर रखकर गोदाम बना लेते हैं।

Author June 2, 2018 5:00 AM
मालवीय नगर के इस गोदाम में लगी आग पर काबू पाने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी, उसने हेलिकॉप्टर की मदद से आग बुझाई थी।

निर्भय कुमार पांडेय

राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार है। यही कारण है कि राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। पिछले 15 दिनों में दिल्ली अग्निशमन विभाग को रोजाना 100 से अधिक जगहों पर आग लगने की सूचना मिल रही है। इनमें से कुछ भीषण आग थी, जिस पर काबू पाने के लिए दमकल वाहनों को घंटों तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि मौसम ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में आग लगने की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी।

नमी खत्म होने पर लगती है भीषण आग
दिल्ली अग्निशमन विभाग के फायर अधिकारी प्रथम, अतुल गर्ग का कहना है कि इस मौसम में वतावरण में नमी समाप्त हो जाती है। इस कारण एक छोटी सी चिंगारी से लगी आग भीषण रूप धारण कर लेती है। ज्यादातर मौकों पर यही देखा गया है। वहीं, खाली स्थानों और कबाड़ के गोदामों में आग लगने की घटनाओं के पीछे लोगों की लापरवाही देखी गई है। लोग नियमों को ताक पर रखकर गोदाम बना लेते हैं। अक्सर वहां से गुजरने वाले लोग या फिर वहां का कर्मचारी बीड़ी या फिर सिगरेट पीकर फेंक देते हैं। गर्मी अधिक होने की वजह से आग तुरंत भीषण रूप धारण कर लेती है। मालवीय नगर गोदाम में लगी आग के पीछे भी यही कारण माना जा रहा है। किसी कर्मचारी ने बीड़ी पी कर गोदाम में फेंकी थी। साथ ही यह बात भी कही जा रही है कि दूसरे हिस्से में वेल्डिंग का काम चल रहा था। हालांकि, कई बार देखा गया है कि शाट-सर्किट की वजह से भी आग चंद मिनटों में विकराल रूप धारण कर लेती है।

जागरूकता और अनदेखी मुख्य वजह
वहीं, दिल्ली अग्निशमन विभाग के फायर अधिकारी द्वितीय विपिन कैंटल मानते हैं कि आग लगने की मुख्य वजह लोगों में जागरूकता की कमी और सुरक्षा को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही है। लोग फैक्टरी, गोदाम और घर बनाते समय अग्निशमन के उपकरण नहीं लगाते या फिर जो लोग लगाते हैं, वे केवल खानापूर्ति करने के लिए होते हैं। ये उपकरण प्रारंभिक स्तर पर भी आग पर काबू पाने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में देखा गया है कि लोग जानबूझ कर लापरवाही बरतते हैं।

करनी पड़ती है कड़ी मशक्कत
विपिन कैंटल ने आगे बताया कि मकान, फैक्टरी और गोदाम बनाते समय सावधानियां नहीं बरती जातीं। यही कारण है कि एक छोटी सी आग भी चंद मिनटों में विकराल रूप ले लेती है और इस पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। दरियागंज और चांदनी चौक जैसे इलाके में चंद मिनट में आग भीषण रूप धारण कर लेती है और दमकल को मौके पर पहुंचने में काफी मुश्किलें होती हैं। यही कारण है कि ऐसे स्थानों पर जान और माल दोनों के अधिक नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है।

दूसरी बार हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल
दिल्ली में दूसरी बार मालवीय नगर स्थित गोदाम में लगी आग पर काबू पाने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया। इससे पूर्व साल 1983 में गोपाल टावर में लगी आग पर काबू पाने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया था।

शुरुआत के तीन मिनट सुनहरा मौका
फायर द्वितीय अधिकारी ने बताया कि आग लगने के बाद शुरूआत के तीन मिनट सुनहरा मौका होता है। जहां कहीं भी आग लगी हो। तीन मिनट के अंदर व्यक्ति को उस स्थान को खाली कर देना चाहिए। इसके बाद धुआं फैल जाता है और आग की लपटें भी तेज हो जाती हैं। इस कारण लोग चाह कर भी बचने के लिए कुछ कर नहीं पाते। ऐसे में लोगों को उन स्थानों पर जाना चाहिए, जहां उन्हें बचने की संभावना दिखती हो।

बचने के उपाय
-यदि आप घर के अंदर हैं तो दरवाजा बंद कर लें और दरवाजे के नीचे कपड़ा लगाकर पानी डाल दें, ताकि आपके कमरे में धुआं न आए।
-अगर आग मकान के निचले मंजिल में लगी हो तो कुछ समय के लिए बालकनी, छज्जा या फिर छत पर चले जाएं, लेकिन अधिक समय तक छत या फिर छज्जे पर न रहें, मदद के लिए आवाज लगाएं।
-खिड़की के पास खड़े हो जाएं और नाक व मुंह पर गीला कर कपड़ा बांध लें, साथ ही खिड़की से आवाज लगाकर या फिर किसी कपड़े को हिलाते रहें, ताकि बचाव दल की नजर आप पर पड़ जाए।
-आग लगते ही बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं, लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, सीढ़ियों की मदद से ही नीचे आएं।

 

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