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Mumbai: प्रिंसिपल पर पोलियो प्रभावित शिक्षिका का अपमान करने का आरोप, हो सकती है 5 साल की जेल

मुंबई के सांताक्रूज में एक स्कूल प्रिंसिपल को पोलियो पीड़ित शिक्षिका को बेइज्जत करने के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। उन पर विकलांगों के अधिकार एक्ट के तहत धाराएं लगाई गई।

Author Updated: April 5, 2019 5:40 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर- इंडियन एक्सप्रेस

मुंबई के सांताक्रूज में एक स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ पोलियो प्रभावित एक शिक्षिका की बेइज्जती करने के आरोप में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। 53 वर्षीय पीड़ित युवती ने फरवरी में स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। बाद में पुलिस ने 23 मार्च को विकलांगों के अधिकार एक्ट के तहत आरोपी प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

वेतन भी नहीं था सामानः सांताक्रूज पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अप्रैल, जून और अक्टूबर 2018 में इन तीन मौकों पर स्कूल के स्टाफ के लोगों के सामने प्रिंसिपल ने पीड़ित युवती की विकलांगता को लेकर टिप्पणी की थी। यही नहीं पीड़िता ने बताया कि प्रिंसिपल उन्हें अन्य शिक्षकों के मुकाबले वेतन भी कम देती थी।

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प्रिंसिपल ने आरोपों को गलत बतायाः स्कूल प्रिंसिपल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते हुए अग्रिम जमानत के लिए सेशन कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि सांताक्रूज पुलिस ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। पुलिस ने बताया कि उनके पास स्कूल की अन्य शिक्षकों के बयान गवाह के तौर पर मौजूद हैं जिसके चलते उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। अभी मामले की जांच जारी है। अदालत शुक्रवार (5 अप्रैल) को याचिका पर फैसला करेगी।

 वकील ने पीड़िता पर लगाया झूठ बोलने का आरोपः स्कूल प्रिंसिपल की वकील ने शिक्षका के आरोपों को खारिज किया। साथ ही कहा कि शिक्षिका ने अपनी शिकायत में कहीं भी पिछले साल हुई इन घटनाओं की शिकायत इतनी देर से करने के कारण का जिक्र नहीं किया है। प्रिंसिपल ने अपने वकील के माध्यम से कहा कि शिक्षिका ने यह शिकायत उस समय की जब स्कूल में पेरेंट-टीचर मीटिंग के दौरान उनके व्यवहार को लेकर उन्हें शो कॉज नोटिस जारी किया गया था। यही नहीं उन्होंने कहा कि शिक्षिका द्वारा उनके खिलाफ शिकायत करने की एक वजह यह भी है कि उनकी शिक्षण योग्यता स्कूल के हिसाब से नहीं थी, क्योंकि साल 2014 में स्कूल ने अपने बोर्ड को सीनियर सेकेंड्ररी बोर्ड से हटाकर इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेंकेडरी एजुकेशन (आईसीएसी) में बदल दिया था।

 

पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में विकलांग अधिकार अधिनियम 2016 के तहत स्कूल प्रिंसिपल पर धारा 7 और 92 लगाई है। ये धाराएं जानबूझकर अपमान करने या किसी व्यक्ति का सार्वजनिक तौर पर अपमान करने पर लगाई जाती हैं। इसमें धारा 92 के तहत न्यूनतम सजा 6 महीने की और अधिकतम सजा पांच साल तक की होती है।

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