फिल्मी सीख

दिल्ली भाजपा आजकल फिल्म से अपने कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं।

दिल्ली भाजपा आजकल फिल्म से अपने कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। पिछले दिनों रिलीज हुई अजय देवगन की नई फिल्म भुज इन दिनों में भाजपा में चर्चा का विषय है। यह फिल्म रिलीज होने के बाद भाजपा अपने पूर्वी दिल्ली के जिला कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को अब तक कई चरण में यह फिल्म दिखा चुकी है। पार्टी के नेता मान रहे हैं कि यह फिल्म देशभक्ति पर आधारित है और इसके माध्यम से कार्यकर्ताओं को सकारात्मक विचार दिए जा सकेंगे। इसका लाभ पार्टी को मिलेगा। अब कार्यकर्ता फिल्म से मनोरंजन कर रहे हैं या सीख ले रहे हैं ये तो पता चल ही जाएगा लेकिन बेदिल ने कहीं सुना कि ये फिल्म कार्ड नेताओं को 2022 में होने वाले निगम चुनाव के लिए देशभक्ति से जुड़ा मुद्दा जरूर देगी।
नई समस्या

छोटे बच्चों के स्कूल खोलने की असमंजस भरी स्थिति ने गांवों और कॉलोनियों में दुकानों की तर्ज पर खुले स्कूल संचालकों की मौज कर दी है। पता चला है कि ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को निजी संचालक धमका रहे हैं। तीन से छह महीने की फीस के भुगतान के अलावा उनसे वर्दी, किताबें नहीं खरीदने पर आगे पढ़ाई बंद करने और नाम काटने पर टीसी नहीं देने की धमकी दी जा रही है। लेकिन अभिभावकों की सुनने वाला कोई नहीं है। पहले कोरोना काल में काम छूटा फिर कारोबार की मंदी झेलनी पड़ी। खाने-पीने और जरूरत का सामान अलग से महंगा है। बेदिल ने किसी से सुना चारों तरफ दिक्कतों को झेल रहे अभिभावक कहीं सुनवाई न होने पर अब बच्चों की पढ़ाई के लिए धमकी भी खुशी-खुशी झेलने को तैयार दिख रहे हैं।
दिखावटी पखवाड़ा

दिल्ली पुलिस की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक यह भी है कि हिंदी में भी काम काज को बढ़ावा मिले। लेकिन इसका परिणाम नहीं दिखता। आश्चर्य तो तब होता है जब हिंदी दिवस पर भी पूरा विभाग अंग्रेजी को सलामी ठोंकता दिखता है। हिंदी को लेकर बीते कुछ दिनों से कुछ जिलों से हिंदी में सूचनाओं का आदान-प्रदान शुरू किया गया। इसकी देखा-देखी कुछ अन्य यूनिटों में भी काम शुरू हुआ। लेकिन यह क्या? जैसे ही हिंदी पखवाड़ा शुरू हुआ, हिंदी में आदान प्रदान भी बंद और ऊपर से सारा काम अंग्रेजी में शुरू कर दिया गया। किसी ने मजा लिया कि- ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं ठंडे बस्ते में ही रहती हैं।
इंजीनियर सिपाही

अब इसे बेरोजगारी की मार कहें या फिर दिल्ली पुलिस का आकर्षण कि 12वीं पास योग्यता वाले सिपाही के पद पर इस बार तीन बीटेक पास कर चुके युवाओं की बहाली बीते दिनों चर्चा का विषय बना रहा। दरअसल बीते दिनों पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की ओर से पासिंग आउट परेड में इनकी भी सलामी ली गई थी । यहां 116वीं बैच के इन 312 जवानों में बतौर सिपाही न केवल बीटेक डिग्री धारी शामिल हैं बल्कि बीबीए, बीसीए और पीजी उत्तीर्ण युवा भी शामिल हैं। इस बाबत पत्रकारों के बीच हो रही चर्चा में एक वरिष्ठ अधिकारी भी कूद पड़े। उन्होंने कहा-इसे सकारात्मकता से देखेंं! इसे बेरोजगारी से न तौलें बल्कि इसे दिल्ली पुलिस की बढ़ती दक्षता मानें, तो बेहतर होगा! अब बड़े अधिकारी से बैर कौन मोल ले भला! लिहाजा ज्यादातर लोगों ने ‘शांति-सेवा-न्याय’ वाली दिल्ली पुलिस में सिपाही के इस नौकरी को ‘इंजीनियरिंग और प्रबंधन’ से ऊपर मान लिया गया।
मुंह पर पट्टी

दिल्ली पुलिस के मुखिया अपने मातहतों को हमेशा बर्ताव को लेकर हिदायत देते रहते हैं लेकिन अधिकारी एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं। अब इंटरनेट के समय में अगर किसी फर्जी वीडियो या खबर की पुष्टि के लिए पुलिस अधिकारियों से पूछा जाए तो भी वे जहमत नहीं उठाते, भले ही उनके जिले में वायरल वीडियो आगे चलकर कोई बड़ा हंगामा खड़ा कर दे। एक जिले में तो ऐसे पुलिस उपायुक्त तैनात हैं जिन्होंने अपने मुंह पर पट्टी बांध रखी है और कुछ न बताने की जैसे कसम खाई हो। पिछले दिनों एक बच्ची से बलात्कार के आरोपी को पीटने का वीडियो चर्चा में आया तो खबरनवीस वीडियो से जुड़ी पुष्टि के लिए उपायुक्त से पूछते रह गए लेकिन उनके मुंह से पट्टी नहीं हटी। बेदिल को पता चला कि ये साहब पूर्वी जिले में भी ऐसे ही चुप्पी साध लेते थे। जिले के वाट्सऐप समूह पर भी साहब ईद के चांद की तरह ही नजर आते हैं। कभी-कभी। अब अगर सही सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में इतनी कोताही बरती जाएगी तो दिल्ली में फर्जी वीडियो से फैले तनाव को रोकने के लिए विभाग को अतिरिक्त मेहनत को करनी ही पड़ेगी न।
-बेदिल

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