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राजनीतिक लड़ाई में बली का बकरा बन रहे हैं अधिकारी

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के बहाने केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार से लड़ते-लड़ते दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
Author नई दिल्ली | January 3, 2016 01:56 am

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के बहाने केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार से लड़ते-लड़ते दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अरविंद केजरीवाल ने पिछले साल फरवरी में सरकार में आते ही आइएएस अफसरों से नाराज होकर प्रादेशिक सेवा दानिक्स के अधिकारियों से काम लेना शुरू किया था। आइएएस और दानिक्स अधिकारियों से नाराज होकर सरकार तीसरे श्रेणी के अधिकारियों (दास कैडर) को महत्व दे रही है।

सरकार की नाराजगी का आलम यह है कि दानिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री को नए साल की बधाई देने गए तो उन्होंने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। एशोसिएशन ने अपनी समस्याओं के बारे में बातचीत के लिए मुख्यमंत्री से मिलने का के लिए समय मांगा तो मुख्यमंत्री सचिवालय ने उन्हें आज तक जबाब नहीं दिया है। अधिकारियों में एसी दहशत है कि कोई खुल कर बोलने को तैयार नहीं है।

दिल्ली के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार के खिलाफ दिल्ली सरकार के आइएएस अधिकारी और दानिक्स अधिकारी एक दिन (31 दिसंबर) को सामूहिक अवकाश पर रहे। यह जग जाहिर है कि दानिक्स और आइएएस अफसरों में हर दम तैनाती के लिए तनी रहती है। इसके बाद भी दानिक्स एसोसिएशन के बिना मांगे आइएएस एसोसिएशन ने समर्थन दिया। जो हालात हैं उसमें लोग समझ नहीं पा रहे है कि काम कैसे होगा।

टोका-टाकी और काम में व्यवधान डालने के चलते हर विभाग में सैकड़ों फाइलें रुकी पड़ी हैं। अधिकारी फैसला लेते हुए डर रहे हैं। केजरीवाल सरकार बनने के दिन से ही एक-दूसरे अधिकारी पर कीचड़ उछालना, वरिष्ठ अधिकारी के कमरे में ताला लगवाना, अपने विभाग की फाइल की सुरक्षा के लिए अपने कमरे के बाहर पुलिस तैनात करना, एक-दूसरे की जासूसी करना, सालों से साथ काम करने वाले अफसरों में संवादहीनता आदि ने दिल्ली की अफसरशाही का माहौल ही बदल दिया है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे काम कैसे करें, किसके आदेश का पालन करें।

उपराज्यपाल नजीब जंग ने सीएनजी फिटनेश घोटाले की जांच के लिए दिल्ली सरकार के पूर्व न्यायाधीश एसएन अग्रवाल आयोग की तरह 21 दिसंबर को दिल्ली सरकार ने दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए पूर्व सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम की अगुवाई में बने एक सदस्यीय जांच आयोग के गठन को मंजूरी नहीं दी है। जंग ने केंद्र सरकार को लिखा कि इसके लिए दिल्ली सरकार ने पहले से मंजूरी नहीं ली है। इसी तरह की टिप्पणी राजनिवास (उपराज्यपाल दफ्तर) से विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बिना केंद्र सरकार की इजाजत से पास किए गए 14 विधेयकों के लिए केंद्र सरकार को लिखा है। अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली सरकार को आयोग गठित करने का अधिकार है। लेकिन वास्तव में अब तय हो गया है कि उन बिलों में से कोई कानून नहीं बन पाएगा। इसके अलावा जंग ने चार पन्ने का एक सरकुलर जारी कर अफसरों को गैर कानूनी काम न करने की हिदायत दी है। पत्र में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।

इसके बाद हालात और बिगड़ गए। सरकारी वकीलों के वेतन चार गुना बढ़ाने की फाइल पर विशेष सचिव अभियोजन यशपाल शर्मा और विशेष सचिव कारगाह सुभाष चंद्रा ने जबरन हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो मंत्री सतेंद्र जैन ने उन्हें निलंबित कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि मंत्री अधिकारी को निलंबित कर दे। हालांकि दिल्ली के अधिकारियों को उपराज्यपाल केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से नियंत्रित करते हैं। अफसरों की नियुक्ति से लेकर तबादला और निलंबन का अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय को है। गृह मंत्रालय ने अधिकारियों के निलंबन को नहीं माना। बस क्या था केजरीवाल अफसरों को भाजपा का समर्थक बता कर सारे नए लोगों से काम करवाने की घोषणा कर दी।

इस लड़ाई में किसी के साथ खुलकर न आने वाले अफसरों की तादात ज्यादा है। उन्हें लगता है कि राजनीतिक लड़ाई में उनकी बलि क्यों दी जा रही है। एक आला अधिकारी ने कहा कि आपसी तालमेल से राजनिवास और दिल्ली सचिवालय में काम होता रहा है। नीति सरकार तय करती है उसे अधिकारी लागू करते रहे हैं। अधिकारी मानते हैं कि किस के अधिकार में क्या है, यह पहले से तय है फिर उन्हें क्यों पक्ष बनाया जा रहा है। उन्हें परेशान किया जा रहा है। दिल्ली सरकार का ज्यादातर काम ठप पड़ा है। वे इसी बात को समझाने के लिए मुख्यमंत्री से समय मांग रहे हैं लेकिन वे टकराव बढ़ाने में लगे हैं। बताते हैं कि पहले हुए आइएएस अफसरों से विवाद के बाद ही उन्होंने दानिक्स अफसरों के लिए नया वेतनमान देने की घोषणा की थी। इसे केंद्र सरकार ने नहीं माना।

दिल्ली सरकार में आइएएस के करीब 50 पद स्वीकृत हैं। लेकिन वे सौ पदों पर जमे रहते हैं। अभी करीब 60 दानिक्स अधिकारी ही दिल्ली सरकार में तैनात हैं। दानिक्स अधिकारी चाहते हैं कि जिन पदों पर आइएएस बैठे हैं, वे इसे कैडर पद करें तो उसमें से एक तिहाई पद दानिक्स को मिल जाएगा। यही विवाद दानिक्स और दास कैडर का है। करीब 350 दानिक्स अफसरों में से 200 दिल्ली में हैं। कई ऐसे पदों पर वे हैं जो दास के अफसरों को मिलने चाहिए। केजरीवाल ने दानिक्स के बगावत करने पर दास अफसरों को पटाने के लिए उनके पद में बदलाव का आश्वासन दिया है। लेकिन यह काम भी केंद्र की बिना अनुमति के नहीं हो सकता है। आप सरकार ने राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ जबरन अफसरों से लड़ाई मोल ली है। अगर अफसरों से सरकार का विवाद नहीं सुलझा तो सरकार कैसे काम करेगी यह समझ से परे है।

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