फुलझड़ी के साथ भी मना सकते हैं उत्सव; हरित पटाखों की आड़ में प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; कहा- हमारे आदेश का पालन हो

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत उत्सव मनाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन दूसरे नागरिकों के जीवन की कीमत पर नहीं। पीठ ने कहा कि जश्न का मतलब तेज पटाखों का इस्तेमाल नहीं है।

Deepawali, Supreme Court
उच्चतम न्यायालय की सख्ती के बावजूद कई पटाखा निर्माता प्रतिबंधित सामग्री वाले पटाखे बना रहे हैं। (Source: @AkashvaniAIR/File photo)

दिवाली आने में अब थोड़ा ही समय रह गया है। ऐसे में पटाखा निर्माता पटाखों को बनाने में तेजी ला दिए हैं। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दिल्ली समेत कई सरकारों ने पटाखों के बजाने पर प्रतिबंध जरूर लगाया हुआ है, लेकिन कई निर्माता अब भी उसको बनाने में जुटे हैं। इतना ही नहीं हरित पटाखों को बनाने की आड़ में कई निर्माता प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। हालांकि कोविड महामारी और प्रदूषण की समस्या को देखते हुए पटाखों को पूरी तरह से बंद करने की मांग की जा रही है।

बिना शोर वाले और गैरहानिकारक पटाखों से उत्सव मनाने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ी है। तमाम लोग पटाखों के बजाए दूसरे तरह की चीजों से जश्न मनाने में रुचि ले रहे हैं। उच्चतम न्यायालय भी इसको प्रोत्साहित करने की बात कह रहा है। हालांकि तमाम पटाखा निर्माता अपनी रोजी-रोटी की बात कहकर इस काम को बंद करने से इंकार कर रहे हैं। इसके चलते कई बार गैरकानूनी रूप से प्रतिबंधित सामग्री इस्तेमाल करने पर खतरे भी हुए हैं और जानें भी गई हैं।

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के उसके पहले के आदेश का पालन हर राज्य को करना चाहिए। न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत उत्सव मनाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन दूसरे नागरिकों के जीवन की कीमत पर नहीं। पीठ ने कहा कि जश्न का मतलब तेज पटाखों का इस्तेमाल नहीं है, यह “फुलझड़ी” के साथ भी हो सकता है और शोर न मचाने वाले पटाखों के साथ भी।

पीठ ने कहा, “हमारे आदेश का पालन किया जाना चाहिए। सवाल एक सामग्री के बजाय दूसरी सामग्री के इस्तेमाल का नहीं है। इसे बाजार में खुलेआम बेचा जा रहा है और लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि अगर प्रतिबंध है तो वे बाजारों में कैसे उपलब्ध हैं?”

जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, याचिकाकर्ता अर्जुन गोपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उन्होंने सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया है और जो पता चला है वह वास्तव में बहुत परेशान करने वाला है।

पटाखों के निर्माता संघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने दलील दी कि उद्योग को सरकार द्वारा जारी प्रोटोकॉल के अनुसार काम करना चाहिए। दवे ने कहा, “यह एक संगठित उद्योग है। लगभग पांच लाख परिवार हम पर निर्भर हैं। जहां तक शिवकाशी का संबंध है, हम सभी सावधानियां बरत रहे हैं।”

शीर्ष अदालत ने कहा कि मुख्य कठिनाई उसके आदेशों के क्रियान्वयन को लेकर है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव दत्ता ने कहा कि यदि एक या दो निर्माता आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं तो पूरे उद्योग को इसका नुकसान नहीं होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने पक्षों से सीबीआई रिपोर्ट के जवाब में दायर जवाबी हलफनामों की प्रतियों एक-दूसरे को देने के लिए कहा और मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर को तय की।

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट