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दो साल बाद त्योहार : महंगाई में बढ़ी मूर्ति की लागत लेकिन अच्छे कारोबार की उम्मीद बरकरार

कोरोना के कारण पूर्णबंदी और उत्सवों पर लगी रोक हटने के बाद यह पहला मौका होगा जब दुर्गा पूजा और नवरात्रि धूमधाम से मनाया जाएगा।de

दो साल बाद त्योहार : महंगाई में बढ़ी मूर्ति की लागत लेकिन अच्छे कारोबार की उम्मीद बरकरार
सांकेतिक फोटो।

निर्भय कुमार पांडेय

ऐसे में बंद पड़ा मूर्ति कारीगरों का काम फिर से रफ्तार पकड़ चुका है। लेकिन काम की लागत इस बार थोड़ी बढ़ गई है। महंगाई का असर दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण पर भी दिख रहा है। लेकिन कारीगरों को उम्मीद है कि इस साल कारोबार अच्छा होगा। यमुना खादर में पीओपी से मूर्ति बनाने वाले रावत मूर्तिवाले बताते हैं कि पहले जहां 20 किलो पोओपी (प्लास्टर आफ पैरिस) की बोरी 120 रुपए में थी, अब 220-240 रुपए में मिल रही है।

बड़ी मूर्तियों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला खड़िया भी दो-तीन गुना महंगा हुआ है। इसी प्रकार पहले एक मूर्ति के निर्माण में 300 रुपए का कच्चा पेंट अब 600 रुपए में आ रहा है। कुछ पेंट 750 रुपए तक हो गए हैं। मूर्ति कारीगर आकाश बताते हैं कि तीन साल में पहली बार कुछ लोग गणेश पूजा पर अग्रिम मूर्ति बुकिंग कराके गए। लेकिन इस बार कारोबार अच्छा हुआ।

अक्षरधाम मंदिर के सामने यमुना खादर में अपने परिवार के साथ मूर्ति बनाने में व्यस्त सोमती ने बताया कि कोरोना संकट से पहले मूर्ति के निर्माण में लागत की चिंता नहीं होती थी। क्योंकि यह वसूल हो जाता था, लेकिन कोरोना के बाद से लागत घर से लगानी पड़ती है। यमुना खादर में ही मूर्ति कारीगर राकेश ने बताया कि नवरात्रि के मौके पर अच्छे कारोबार की उम्मीद है। पहले तो 70-80 मूर्ति एक-एक कारीगर बनाता था और लगभग सभी बिक जाती थी। इस बार गणेश तो नहीं लेकिन भगवान विश्वकर्मा की कई मूर्तियां बच गर्इं हैं। वह कहते हैं कि इस बार अच्छे कारोबार की उम्मीद से अपने पूरे परिवार के साथ मूर्ति बनाने में व्यस्त हूं। हालांकि, अग्रिम बुकिंग कराने वालों की संख्या अब भी बहुत ही कम है।

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First published on: 26-09-2022 at 08:31:41 am
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