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किसान मुद्दों का जल्द समाधान करिए, प्रदर्शन की वजह से रोज हो रहा 3500 करोड़ का नुकसान; ASSOCHAM ने की सरकार से अपील

एस्सोचैम ने प्रेस रिलीज में कहा कि ये प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका हैं। ट्रांसपोटेशन व्यवस्था में परेशानी और अन्य कारणों से रोजाना 3000 से 3500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

ASSOCHAM President Niranjan Hiranandanतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (ANI)

एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) ने मंगलवार को बताया कि किसान प्रदर्शन के चलते उसे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापार संगठन ने कहा कि उसे रोजाना करीब 3500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। ऐसे में सरकार और किसानों से अपील है कि वो जल्द से जल्द इसका समधाना निकालें। पंजाब और हरियाणा सहित अन्य राज्यों के किसान पिछले बीस दिनों से केंद्र के तीन नए कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। अन्नदाताओं ने इन बिलों को किसान विरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की है।

एस्सोचैम ने प्रेस रिलीज में कहा कि ये प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका हैं। ट्रांसपोटेशन व्यवस्था में परेशानी और अन्य कारणों से रोजाना 3000 से 3500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। बता दें कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्थाएं हालांकि मुख्य रूप से कृषि और बागवानी पर आधारित हैं मगर अन्य उद्योग जैसे फूड प्रोसेसिंग, कपास, वस्त्र, ऑटोमोबाइल सेक्टर, कृषि मशनीनरी और आईटी क्षेत्र इन राज्यों की जीवन रेखा बनकर उभर हैं। इसके अलावा पर्यटन, व्यापार और परिवहन के अलावा अन्य क्षेत्रों ने इन राज्यों की अर्थव्यवस्था में इजाफा किया है।

ASSOCHAM के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 18 लाख करोड़ रुपए हैं। इस बीच सड़कों पर चल रहे किसानों आंदोलन, नाकाबंदी, टोला प्लाजा, रेलवे गतिविधियों में रुकावट के चलते आर्थिक गतिविधियों में खासी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि कपड़ा उद्योग, ऑटो कंपोनेंट, साइकिल और खेल के अन्य सामान के उद्योग जो निर्यात बाजार में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, क्रिसमस से पहले अपने ऑर्डर पूरे करने में सक्षम नहीं होंगे। इससे वैश्विक बाजार में बाजार की अच्छी छवि को नुकसान पहुंचेगा।

बता दें कि किसान नवंबर की 26 तारीख से  केंद्र के तीन नए कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों से केंद्र इन्हें वापस लेने की मांग की है। इस बीच सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच इस मुद्दे को हल करने के लिए पांच चरण में वार्ता हो चुकी है मगर अभी तक कोई हल निकलता नजर नहीं आता। वहीं किसानों ने उनकी मांगें ना मानने पर आंदोलन को और तेज करने की धमकी दी है।

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