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उचित मुआवजा नहीं मिलने से नाराज किसान ने सचिवालय में ही खाया जहर, बेटे ने भी सहायता लेने से किया मना

किसान धर्मा पाटिल तापीय विद्युत संयंत्र के वास्ते उनकी जमीन के एवज में अपर्याप्त मुआवजे को लेकर परेशान थे और उन्होंने मुम्बई में सचिवालय में अपनी जान देने की कोशिश की थी।

Author मुंबई | Updated: January 24, 2018 7:09 PM
खुदकुशी की कोशिश करने वाले किसान को दक्षिण मुम्बई के सेंट जार्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में कथित रूप से खुदकुशी की कोशिश करने के उपरांत गंभीर स्थिति से गुजर रहे 84 वर्षीय किसान को सहायता की पेशकश की है लेकिन उसके बेटे ने कोई भी राहत लेने से इनकार कर दिया है। राज्य के ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बवानकुले ने 84 वर्षीय किसान धर्मा पाटिल के लिए सहायता की घोषणा की थी। पाटिल तापीय विद्युत संयंत्र के वास्ते उनकी जमीन के एवज में अपर्याप्त मुआवजे को लेकर परेशान थे और उन्होंने मुम्बई में सचिवालय में अपनी जान देने की कोशिश की थी। वह अपनी जमीन के अधिग्रहण के एवज में राज्य सरकार से ऊंची मुआवजा राशि के अनुरोध के साथ सोमवार को बुल्ढ़ाना जिले के सिंदखेरद्राजा से मंत्रालय (सचिवालय) आए थे। बाद में उन्होंने सचिवालय परिसर में कथित रूप से जहर खा लिया था और उन्हें दक्षिण मुम्बई के सेंट जार्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया।

उनके बेटे नरेंद्र पाटिल ने कहा, ‘‘मुझे बताया गया है कि सरकार ने मेरे परिवार के लिए 15 लाख रुपए की वित्तीय सहायता की पेशकश की है।’’ नरेंद्र ने कहा, ‘‘मैंने लेने से मना कर दिया क्योंकि मेरे पिता पैसे की भीख नहीं मांग रहे हैं। हम बस यह चाहते हैं कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में समरूपता हो क्योंकि हमारे पड़ोसी को हमारी तुलना में अधिक ऊंचा दाम मिला है।’’

उसने सवाल किया, ‘‘यदि राज्य हमारे पड़ोसी को उसकी जमीन के लिए ऊंचा दाम दे सकता है तो वह हमें कैसे निम्न दाम दे सकता है। दोनों भूखंड एक दूसरे के अगल-बगल हैं तो ऐसे में विषमता क्यों है।’’ नरेंद्र ने मंगलवार को कहा था कि उसके पिता को पांच एकड़ जमीन के लिए बस चार लाख रुपए मुआवजा मिला जबकि उसके पड़ोसी को दो एकड़ जमीन के लिए 1.89 करोड़ रुपए मिले। उसके पिता इस संबंध में शिकायत को लेकर तीन महीने से यहां आ रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ, बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को मुम्बई के पुलिस आयुक्त को कथित रूप से हिरासत में हुई 29 साल के व्यक्ति की मौत की जांच शुरू करने का निर्देश दिया। दीपक जाधव मानखुर्द थाने में फांसी के फंदे से लटकते हुआ मिला था। पुलिस ने दावा किया था कि यह आत्महत्या का मामला है । लेकिन उसने न तो प्राथमिकी दर्ज की और ही इस मामले की न्यायिक मजिस्ट्रेट से जांच करवाई जबकि सीआरपीसी के तहत ऐसे मामले की न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच कराना अनिवार्य है।

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