किसान आंदोलनः जो हमने भुगता, उसे सारी उम्र नहीं भूलेंगे, सर्द मौसम की बारिश को याद कर कही ये बात

बठिंडा से टिकरी आई परमजीत कौर कहती हैं कि अपने गांव लौटना भी आसान नहीं होगा। “हमारे दिलों को यह मुश्किल लगेगा। हम यहां अपने हाथों से बनाए गए घरों को छोड़ दें।”

पिछली सर्दियों में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन करते किसान। (फाइल फोटो)

दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों ने कृषि आंदोलन को लेकर जो तकलीफें और मुसीबतें झेली हैं, वे उस पर बात करके दुख से भर जाते हैं। उनका कहना है कि जो कुछ हमने भुगता है, उसे सारी उम्र नहीं भूलेंगे। कहा कि सर्द मौसम की बारिश को यादकर रोएं खड़े हो जाते हैं। उनका कहना है कि हालांकि पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की बात कही है, लेकिन हम इतनी तकलीफें झेलने के बाद केवल आश्वासन से वापस नहीं चले जाएंगे। हमें तो उस दिन का इंतजार है, जब कानून वापसी पर राष्ट्रपति की मुहर लग जाए।

किसान बताते हैं कि जब कानून बना और किसान विरोध करने के लिए दिल्ली की ओर बढ़े तब हमें टिकरी (पश्चिम दिल्ली की सीमा), सिंघू (राजधानी के उत्तर-पश्चिम) और गाजीपुर (पूर्व दिल्ली) पर रोक दिया गया। हम वहीं रुक गए और अब तक जमे हैं। हमने अपने बच्चों की भविष्य के लिए बच्चों से दूर हो गए। आंदोलन कर रहे हैं और उसे पूरा कराकर ही लौटेंगे।

पंजाब के मंसा जिले के भिक्खी गांव के जसकरण सिंह नाम के किसान ने कहा, “हमने कृषि कानूनों के विरोध में सड़कों पर रहने के लिए अपने घर के आराम को पीछे छोड़ दिया। यह आसान नहीं है जब आपके सिर पर उचित छत न हो।” कहा कि “यह कठोर सर्दियों की रातों और गर्मी के दिनों का वर्ष रहा है, लेकिन सबसे खराब समय वह रहा है जब सर्दी के मौसम में तेज बारिश हो रही थी।”

कहा कि “उन रातों में किसी के लिए सोना कितना मुश्किल था। कई बार हवा के साथ टेंट की अस्थायी छत उड़ जाती थी। जब भी ऐसा होता, हम इसे ठीक कर देते।”

बठिंडा जिले के कोटरा कोरियांवाला गांव से टिकरी आई परमजीत कौर कहती हैं, हालांकि अपने गांव लौटना भी आसान नहीं होगा। “हमारे दिलों को यह मुश्किल लगेगा। हम यहां अपने हाथों से बनाए गए घरों को छोड़ दें, जिसमें हमने अपने पंजाब के घर जैसी सारी सुविधाएं बनाई हैं। यह काम बहुत कठिन समय में किया गया।”

70 वर्षीय तन्ना सिंह पिछले 26 नवंबर, 2020 से एक दिन के लिए भी टिकरी में किसानों के विरोध स्थल को नहीं छोड़े हैं। लगभग एक साल बाद 19 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री की कानून वापस लेने की घोषणा के बावजूद उनका कहना है कि वह तब तक टिकरी में रहेंगे, जब तक यह कानून पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है।

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट