किसान आंदोलन के 300 दिन पूरे, चढ़ूनी बोले- सीमाएं खोलने का सपना न देखे सरकार, कानून वापसी तक नहीं जाएंगे घर

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 300 दिन पूरे कर चुका है। इस अवसर पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि जबतक काले कानूनों की वापसी नहीं होगी, किसान घर नहीं जाएंगे।

farmer protest delhi, farmer agaist farm law,
किसान आंदोलन के 300 दिन पूरे (फाइल फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव)

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन अब 300 दिन पूरे कर चुका है। किसान और सरकार के बीच गतिरोध अभी भी जारी है। आंदोलन के 300 दिन पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन देश के लाखों किसानों की इच्छाशक्ति का सबूत है।

इस अवसर पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा है कि सरकार सीमाओं को खोलने का सपना ना देखे, किसान कानून वापसी तक घर नहीं जाने वाले हैं। वहीं किसान संगठनों ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। सरकार हठपूर्वक किसानों की जायज मांगों को नहीं मानने पर अड़ी है। यह स्थिति तब है जब देश में किसानों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।

किसान संगठन ने 27 सितंबर को बुलाए गए भारत बंद को लेकर अब तैयारियां जोरों से शुरू कर दी है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में समाज के विभिन्न वर्गों से किसान संगठन संपर्क कर रहे हैं ताकि किसानों की मांगों को लेकर समर्थन और एकजुटता प्राप्त की जा सके। यह आंदोलन देश के लोकतंत्र को बचाने का आंदोलन बन गया है।

हरियाणा भारतीय किसान यूनियन(चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बुधवार को कहा कि जबतक केन्द्र तीन नए कृषि कानूनों को वापस नहीं लेता, तबतक दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान वहां से नहीं हिलेंगे। चढ़ूनी ने कहा कि सरकार चाहे जितना दबाव डाले लेकिन किसान कानून रद्द होने तक हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर से एक इंच भी नहीं हिलेंगे। सरकार सीमाएं खोलने का सपना ना देखे।

हरियाणा सरकार ने कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर गतिरोध को खत्म करने के लिए किसान नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था, लेकिन किसान यूनियन के नेता पिछले सप्ताह सोनीपत में जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए थे। किसान नेताओं के बैठक में शामिल नहीं होने पर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने चंडीगढ़ में कहा कि उच्चतम न्यायालय को इसकी जानकारी दी जाएगी।

बता दें कि किसान आंदोलन की शुरूआत में तो सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए थे। किसान जहां कानून वापसी की मांग पर अड़े हैं, वहीं सरकार संशोधन की बात कह रही है।

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट