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महाराजा की वसीयत से छेड़छाड़, राजपरिवार के सदस्य समेत 23 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ धोखाधड़ी का केस; जानें पूरा मामला

मामले में एसएसपी स्वर्णदीप सिंह ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर अमृत कौर ने यह शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में अमृत कौर का कहना है कि इन लोगों ने फरीदकोट के शासक की फर्जी वसीयत तैयार कराई थी।

Faridkot Maharaja, Harinder Singh Brar, Maharwal Khewaji Trust,फरीदकोट के महाराजा हरिंदर सिंह बराड़। (फाइल फोटो)

फरीदकोट के पूर्व महाराजा हरिंदर सिंह बराड़ की वसीयत से छेड़छाड़ मामले में राजपरिवार के सदस्य जयचंद मेहताब समेत मेहरावल खेवाजी ट्रस्ट के 23 सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया है।

यह केस महाराज की छोटी बेटी अमृत कौर ने दर्ज कराया है। केस में नामजद जयचंद मेहताब अमृत कौर की बड़ी बहन का बेटा है। इसके अलावा वह ट्रस्ट का चेयरमैन भी है। इससे पहले ट्रस्ट की वाइस चेयरपर्सन निशा डी खेर का भी नाम था। निशा महाराजा की पौत्री और मेहताब की बहन है।

जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है उनमें ट्रस्ट की सीईओ जगीर सिंह सरां, ट्रस्ट के लीगल एडवाइजर नवजोत सिंह वहनीवाल, परमजीत सिंह संधू, संतोष कुमार, जसपाल ककौर व अन्य लोग शामिल हैं। मामले में एसएसपी स्वर्णदीप सिंह ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर अमृत कौर ने यह शिकायत दर्ज कराई है।

अपनी शिकायत में अमृत कौर का कहना है कि इन लोगों ने फरीदकोट के शासक की फर्जी वसीयत तैयार कराई थी। मालूम हो कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने महाराजा की 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का दो बेटियों और भाई के परिवार में बंटवारा किया था। इसके तहत दोनों बेटियों को कुल संपत्ति का 37.5 फीसदी हिस्सा और राजा के भाई मंजीत इंदर सिंह को 25 फीसदी संपत्ति मिलने की बात कही थी।

फैसले में हाईकोर्ट ने कुछ हिस्से पर महारानी महिंदर कौर का हक भी माना था। इससे पहले सुनवाई को लेकर राजा के भाई के पोते कंवर अमरइंदर सिंह के वकील विवेक भंडारी ने बताया कि फर्जी वसीयत 1 जून 1982 को मेहरावल खेवाजी ट्रस्ट की ओर से बनाई गई थी। कोर्ट में यह वसीयत ट्रस्ट की ओर से 2012 में पेश की गई।

यह रजिसटर्ड वसीयत थी और ट्रस्ट की वसीयत में काफी अंतर था। यहां तक टाइपिंग में भी अंतर था। इतना ही नहीं ट्रस्ट की तरफ से राजा की संपत्ति में से करीब 500 करोड़ निकाल लिए गए थे। हाईकोर्ट ने यह पैसा भी ट्रस्ट से वापस लेने का आदेश दिया था।

38 साल बाद आया था फैसला
राजा की बेटी अमृत कौर और उनके भाई कंवर मंजीत इंदर सिंह ने 1992 में ट्रस्ट के खिलाफ जिला अदालत में मुकदमा दायर किया था। उन्होंने मेहरावल खेवाजी ट्रस्ट के खिलाफ संपत्ति को लेकर 1982 में बनाई गई फर्जी विल को लेकर केस दायर किया। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने भी वसीयत को फर्जी बताया। इसके बाद राजा के भाई के पोते कंवर अमरइंदर सिंह ने हाईकोर्ट में अप्रैल 2018 में याचिका दायर की थी।

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