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बनारसः मरीजों के परिजन बोले- बड़े डॉक्टर नहीं आ रहे अस्पताल में, छोटे स्टाफ के भरोसे हैं लोग, एक्सपायरी दवा लेने को मजबूर

व्यवस्था का आलम यह है कि चार-चार दिन से भर्ती मरीजों को कोई पूछने वाला नहीं है। अस्पताल के बाहर ही पीपीई किट फेंका हुआ है। वहीं पर मरीजों के परिजन बैठे हैं। पीपीई किट के डिस्पोजल की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे उनमें भी संक्रमण फैलने की आशंका है।

कोरोना से मचा यूपी में हाहाकार, अस्पताल में नहीं मिल रहा इलाज (फोटोः एजेंसी)

कोविड महामारी से मचे हाहाकार के बीच यूपी के बनारस के बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में भी मरीजों ने लापरवाही बरतने की शिकायत की है। बीएचयू के हॉस्पिटल को पूर्वांचल का एम्स कहा जाता है। यहां के कोविड हॉस्पिटल में व्यवस्था को लेकर मरीजों के परिजनों ने जबरदस्त गुस्सा दिखाया है। उनका कहना है कि यहां न तो किसी का ढंग से इलाज हो रहा है और न ही कोई कुछ बताने को तैयार है। व्यवस्था का आलम यह है कि चार-चार दिन से भर्ती मरीजों को कोई पूछने वाला नहीं है।

परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में पहले तो भर्ती नहीं कर रहे हैं, बड़ी सिफारिश के बाद भर्ती कर लिया तो मरीज को कोई देखने वाला नहीं है। बड़े डॉक्टर आते नहीं हैं और पूरा अस्पताल छोटे स्टाफ के भरोसे चल रहा है। मरीजों से परिजनों को मिलने भी नहीं दिया जा रहा है। मरीज अंदर जीवित है या मर गया है, यह भी बताने वाला कोई नहीं है। दवाइयां भी एक्सपायर्ड मिल रही हैं। अस्पताल के बाहर ही पीपीई किट फेंका हुआ है। वहीं पर मरीजों के परिजन बैठे हैं। पीपीई किट के डिस्पोजल की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे उनमें भी संक्रमण फैलने की आशंका है। मरीजों का आरोप है कि गंभीर रूप से पीड़ित मरीज को भी जनरल वार्ड में रख दिया गया है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण से एक दिन में सर्वाधिक 4,205 लोगों की मौत होने के बाद कुल मृतक संख्या बढ़कर 2,54,197 हो गई, जबकि संक्रमण के 3,48,421 नए मामले सामने आने के बाद देश में अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 2,33,40,938 हो गई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार सुबह आठ बजे तक अद्यतन किए गए आंकड़ों के अनुसार, उपचाराधीन मामले कम होकर 37,04,099 हो गए, जो संक्रमण के कुल मामलों का 15.87 प्रतिशत है, जबकि संक्रमित लोगों के स्वस्थ होने की दर सुधरकर 83.04 प्रतिशत हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,93,82,642 लोग संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके हैं, जबकि मृत्युदर 1.09 प्रतिशत है।

भारत में कोविड-19 के मामले पिछले साल सात अगस्त को 20 लाख की संख्या पार कर गए थे। इसके बाद संक्रमण के मामले 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख और 16 सितंबर को 50 लाख के पार चले गए थे।

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