चुनाव आयोग के कर्मचारी से दोस्ती कर लिए आईडी पासवर्ड और फिर छापने लगे वोटर आईडी कार्ड, हर राज्य का रेट अलग-अलग

फेक वोर्टर आईडी कार्ड बनाने वाले गैंग के मास्टरमाइंड ने कई बड़े खुलासे किए हैं। मास्टरमाइंड की मानें तो हर राज्य के लिए अलग-अलग रेट फिक्स था। सबसे कम दिल्ली का रेट था, जहां खुद मास्टरमाइंड काम करता था।

fake voter id card
फाइल फोटो

फर्जी वोटर आइडी कार्ड नेटवर्क मामले में गिरफ्तार अब मास्टरमाइंड कई राज खोल रहा है। मध्यप्रदेश का रहनेवाला अरमान मलिक इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड निकला है, जो चुनाव आयोग के कर्मचारियों से आइडी पासवर्ड लेकर फर्जी वोटर आईडी कार्ड बना रहा था।

फर्जी कार्ड बनाने का खेल कई राज्यों में चल रहा था। यहां हर राज्य के हिसाब से रेट फिक्स था। सबसे पहले यूपी की सहारनपुर पुलिस को इसकी भनक लगी। पुलिस ने सबसे पहले 11 अगस्त को विपुल सैनी नाम के व्यक्ति को पकड़ा। विपुल सैनी ने अरमान मलिक तक पुलिस को पहुंचाया। फिर जब अरमान मलिक पुलिस के हत्थे चढ़ा तो इस फर्जीवाड़े की कहानी परत दर परत खुलती चली गई।

अरमान ने बताया कि उसका फर्जी वोटर कार्ड का नेटवर्क दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश तक फैला है। दिल्ली में 100 रुपये, यूपी-एमपी में 300 रुपये और राजस्थान में 200 रुपये में फर्जी वोटर कार्ड बनाए जा रहे थे।

अरमान मलिक सबसे पहले चुनाव आयोग में संविदा पर काम करने वाले आदित्य खत्री और नितिन के संपर्क में आया। यहां से अरमान मलिक को चुनाव आयोग का आईडी पासवर्ड मिला। जिसके बाद अरमान ने ये जानकारी सहारनपुर के विपुल सैनी को दी। आईडी पासवर्ड मिलते ही विपुल ने धड़ाधड वोटर आईडी कार्ड बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद येे जानकारी राजस्थान के यू-ट्यूबर दीपक मेहता के पास पहुंची। दीपक अपने भाई संजीव के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने लगा। यहां दीपक अपनी कमाई का 50 प्रतिशत हिस्सा अरमान और विपुल को देता था।

पुलिस को अरमान मलिक ने मध्यप्रदेश के मुरैना के एक कम्प्यूटर ऑपरेटर हरिओम सखवार का नाम भी लिया है। हरिओम पर भी शंका है कि उसने भी वहां फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाएं हैं। इस मामले में पुलिस मुरैना भी पहुंची थी, लेकिन हरिओम उनके आने से पहले ही फरार हो गया था।

सहारनपुर पुलिस ने इस मामले में अरमान मलिक समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का मानना है कि इन लोगों ने कम से कम 10 हजार फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाए हैं। पुलिस अब यह पता करने में जुटी है कि किन-किन लोगों ने और क्यों फर्जी वोटर आईडी बनवाए है। इसमें बग्लादेशी और आतंकी नेटवर्क की भी जांच पुलिस कर रही है।

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