बागपत के रहने वाले 59 साल सात महीने के विजय कुमार शर्मा सोमवार से अपनी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू करेंगे। प्राइवेट स्कूलों में लगभग चार दशक तक पढ़ाने के बाद वे अब एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में सहायक शिक्षक के तौर पर काम शुरू करेंगे।
शर्मा ने इस साल टीजीटी परीक्षा पास की है और अब वह शामली जिले के इंटर कॉलेज आइलम में पढ़ाएंगे। यह स्कूल उनके बागपत जिले के बरावद गांव स्थित घर से 15 किलोमीटर दूर है और सरकार से मदद पाने वाला हायर सेकेंडरी स्कूल है। वह 10वीं कक्षा तक के छात्रों को संस्कृत पढ़ाएंगे।
सरकारी शिक्षक के रूप में नौकरी पाना हमेशा से मेरा सपना था – विजय
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद तीन बेटियों सहित पांच बच्चों के पिता शर्मा ने कहा, “सरकारी शिक्षक के रूप में नौकरी पाना हमेशा से मेरा सपना था और मैंने पिछले 27 सालों में कई प्रयास किए। मैं लगातार परीक्षा देता रहा और अब, 59 वर्ष की आयु में, मेरा सपना आखिरकार सच हो गया है।”
कुमार ने 1987 में ग्रेजुएशन किया, इसके बाद हिंदी और संस्कृत में दो पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्रियां हासिल कीं और 2003 में बीएड पूरा किया। अपने चयन के बारे में बताते हुए शर्मा ने कहा कि इस वर्ष संस्कृत शिक्षकों के 292 पदों के लिए भर्तियां निकली थीं। उन्होंने कहा, “मैंने लिखित परीक्षा कई बार उत्तीर्ण की, लेकिन इंटरव्यू में बार-बार असफल रहा। कई बार मुझे लगा कि चयन प्रक्रिया में ही खामी है, लेकिन मैंने कभी भी इस बाधा को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। मैं कोशिश करता रहा। इस बार साक्षात्कार नहीं हुआ और मेरा मानना है कि इससे मेरे जैसे उम्मीदवारों को खुद को साबित करने का समान अवसर मिला।” उन्होंने चयन प्रक्रिया से इंटरव्यू राउंड को हटाने के लिए सरकार का आभार जताया।
उनके अनुसार, रिटायरमेंट की उम्र 62 साल होने के कारण उन्हें सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए लगभग दो साल और कुछ महीने मिलेंगे। उन्होंने कहा, “मेरा जन्म फरवरी 1967 में हुआ था। मैं दो साल से थोड़ा अधिक समय तक सेवा करूंगा, लेकिन यह भी बेहद संतोषजनक है, सरकारी स्कूल में पढ़ाना मेरा सपना था।” उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले मंगलवार को लखनऊ में स्वयं उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा था।
मेरे पिता 26 बार असफल हुए- ममता शर्मा
विजय के दो बेटे उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं, जबकि उनकी पत्नी कौशल शर्मा गृहिणी हैं। उनके पांच बच्चों में से चार विवाहित हैं। विजय की सबसे बड़ी बेटी ममता शर्मा ने कहा कि उनके पिता उन युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा हैं जो असफलताओं के कारण जीवन से हार मान लेते हैं।
उन्होंने कहा, “मेरे पिता 26 बार असफल हुए, लेकिन मैंने उनमें कभी भी बेबसी या आत्मविश्वास की कमी नहीं देखी। हमारे भाइयों के यूपी पुलिस में चुने जाने के बाद, हमने उनसे कहा कि वे अब परीक्षा न दें, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं मानी और कोशिश करते रहे।”
हमें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा- विजय शर्मा की बेटी
अपने शुरुआती दिनों के बारे में बताते हुए बेटी ने कहा, “शुरुआती दिनों में हमें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि मेरे पिता ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। हम पांच बच्चे थे, सभी उस समय पढ़ाई कर रहे थे। मेरे पिता, जो सादा जीवन जीते हैं, एक निजी स्कूल में पढ़ाते हैं और मामूली आमदनी से घर चलाते हैं। आज भी, वे 10 किलोमीटर साइकिल चलाकर उस निजी स्कूल जाते हैं जहां वे संस्कृत और हिंदी पढ़ाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “वह हमेशा से शिक्षक के रूप में सरकारी नौकरी पाने का सपना देखता था और तमाम संघर्षों के बावजूद, वह हर साल इस पद के लिए आवेदन पत्र भरता था।”
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सुमि गिलहरी बहुत मेहनती है। उसे चंपकवन के जंगल में आए अभी कुछ दिन ही हुए हैं। सुमि की बुआ यहां रहती है। सुमि गिलहरी को नृत्य करने का बेहद शौक है। मगर उसे कोई सिखाने वाला तक नहीं। वह अपने मन में कुछ भी कल्पना करती और नाचती रहती थी। एक बार बुआ उसके घर आई थी। बुआ उसे देखती ही रह गई। ‘अरे, वाह, वाह तुम तो बहुत ही बढ़िया कमर हिला लेती हो सुमि। तुम्हारे शरीर में भरपूर ऊर्जा है। नृत्य करते वक्त चेहरे पर अदाएं भी लाती हो।’ बुआ ने उसकी तारीफ की। सुमी ने कहा, ‘ओह, बुआ लेकिन इस जंगल में मुझे कोई सिखाने वाला नहीं है। बिना प्रशिक्षण के तो मैं कुछ भी नहीं कर पाऊंगी।’ ‘ओह सुमि।’ बुआ की जुबान से निकला। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
