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Lucknow Vivek Tiwari Murder Case: सना ने सुनाई आपबीती- सर नहीं रुकना चाहते थे क्‍योंकि पुलिस हिंसक हो गई थी

Lucknow Vivek Tiwari Apple Store Employee Murder Case: विवेक तिवारी हत्याकांड की चश्मदीद गवाह सना खान कहती हैं कि उस रात एक हत्या हुई थी और मैं चाहती हूं कि आम आदमी इस पर ध्यान दें। मैं फिर से सामान्य जिंदगी जीना चाहती हूं।

Author October 2, 2018 8:17 AM
पुलिस की गोली से मारे गए विवेक तिवारी अपनी पत्नी के साथ। (image source-pankaj jha/twitter)

Lucknow Vivek Tiwari Apple Store Employee Murder Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार (29 सितंबर) की देर रात एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना की चश्मदीद गवाह सना खान ने सोमवार (1 अक्टूबर) को बताया कि, “सर, गाड़ी नहीं रोकना चाहते थे क्योंकि पुलिस हिंसक हो चुकी थी। दो पुलिसवालों में से एक ने शीशे के अंदर जबरदस्ती अपना डंडा डालना शुरू कर दिया। वहीं, दूसरा उन्हें गाड़ी से बाहर निकालना चाहता था। इस परिस्थिति को देख उन्होंने यहां रूकना उचित नहीं समझा और जाने का विचार किया।” दरअसल, अारोप है कि दो पुलिसकर्मियों ने विवेक तिवारी की गाड़ी को रूकवाने की कोशिश की। इस दौरान एक ने गोली मार दी, जिससे विवेक की मौत हो गई।

विवेक तिवारी हत्याकांड की चश्मदीद गवाह सना खान जो कि लखनऊ में किराए के मकान में रहती हैं, पूरे घटनाक्रम पर कहती हैं, “वो (पुलिसवाले) काफी गुस्से में आए थे। रोकने को बोल रहे थे। बाहर आने को बोल रहे थे। एक कॉस्टेबल खिड़की के रास्ते लाठी अंदर घुसाने लगा। जब यह सब चीजें होने लगी तो सर को रूकना ठीक नहीं लगा। विवेक सर ने गाड़ी को आगे बढ़ाने की कोशिश की, इस दौरान बाइक गिर गया। पुलिसवाले दूसरी तरफ खड़े थे। एक बार फिर जब सर ने गाड़ी बढ़ाने की कोशिश की, उनमें से एक जो बाइक चला रहा था, बाइक खड़ी की और सर को निशाना बनाते हुए फायर कर दिया। सर कुछ मिनट तक ड्राइव करते रहे और आखिरकार गाड़ी दीवार में टकरा गई। उन्हें गोली लग गई थी और शरीर से लगतार खून निकल रहा था। उनकी श्वास चल रही थी, लेकिन बोलने में असमर्थ थे।”

एंबुलेंस आने में देरी होने पर सना ने पुलिसवालों से विवेक तिवारी को अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई। इसके बाद पुलिस की गाड़ी में उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद सना को थाने ले जाया गया, जहां एक महिला आरक्षी ने उनका बयान लिया और हस्ताक्षर करवाए। सना कहती हैं, “मैंने पुलिसवालों से गुहार लगाई कि वे मुझे घर ले चलें ताकि मैं अपने फोन से घरवालों से बात कर सकूं। इसके बाद पुलिसवाले मुझे मेरे घर ले गए लेकिन मुझे सिर्फ अपनी मां से बात करने की इजाजत दी। इसके बाद वापस मुझे थाने लगाया गया।” सना कहती हैं, “उस रात एक हत्या हुई थी और मैं चाहती हूं कि आम आदमी इस पर ध्यान दें। मैं फिर से सामान्य जिंदगी जीना चाहती हूं।”  घटना की सूचना के बाद शनिवार को अपनी बेटी के पास पहुंची सना की मां ने कहा, “हम न्याय के लिए लड़ेंगे, लेकिन मुझे ये नहीं मालूम कि करना क्या है? मेरी बेटी ने एमबीए किया है और वह लखनऊ में काम कर रही थी। लेकिन इस घटना ने उसे पूरी तरह बदल दिया है।”

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