Maharashtra Minority Status Rules: महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक दर्जा चाहने वाले स्कूलों और कॉलेजों के लिए नियम जल्द सख्त हो सकते हैं। सरकार की ओर से गठित एक समिति ने आवेदन की प्रक्रिया की निगरानी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के हाथों में देने, आवेदनों की कई विभागों के विशेषज्ञों वाली समिति से जांच कराने और अल्पसंख्यक दर्जा मिलने के बाद भी संस्थानों की समय-समय पर समीक्षा करने की सिफारिश की है।
महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक दर्जा हासिल करने के इच्छुक शैक्षणिक संस्थानों को आने वाले समय में ज्यादा कड़ी जांच से गुजरना पड़ सकता है। द इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार की ओर से गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने अल्पसंख्यक दर्जा देने की मौजूदा व्यवस्था में कई कमियां बताई हैं और प्रक्रिया में कई अहम बदलावों की सिफारिश की है।
महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी की अध्यक्षता वाली इस उच्चस्तरीय समिति ने सुझाव दिया है कि अल्पसंख्यक दर्जे के लिए आने वाले आवेदनों की पूरी प्रक्रिया की निगरानी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, बेहतर होगा कि विभाग के सचिव, की देखरेख में हो। इसके अलावा आवेदनों की जांच केवल अल्पसंख्यक कार्य विभाग के स्तर पर न होकर कई सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों वाली विशेषज्ञ समिति के जरिए कराने की सिफारिश की गई है।
समिति ने यह भी कहा है कि किसी संस्थान को अल्पसंख्यक दर्जा मिलने के बाद मामला खत्म नहीं होना चाहिए। ऐसे संस्थानों की समय-समय पर समीक्षा और निगरानी की व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए।
मौजूदा व्यवस्था में क्या कमी है?
अभी अल्पसंख्यक दर्जे के लिए आने वाले आवेदन अल्पसंख्यक कार्य विभाग में बने एक विशेष डेस्क के जरिए आगे बढ़ते हैं। इस डेस्क की जिम्मेदारी आम तौर पर गैर-आईएएस अधिकारी के पास होती है। मौजूदा व्यवस्था में एक बार किसी संस्थान को अल्पसंख्यक दर्जा मिल जाने के बाद उसकी नियमित समीक्षा या निगरानी के लिए कोई तय व्यवस्था नहीं है।
समिति ने इसी कमी को दूर करने की जरूरत बताई है। उसका सुझाव है कि अल्पसंख्यक दर्जा देने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच और निगरानी होनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दर्जा पाने वाले संस्थान निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं।
अल्पसंख्यक दर्जा मिलने के बाद भी होगी निगरानी
समिति ने मौजूदा संस्थानों की निगरानी के लिए भी एक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत यह देखा जाएगा कि जिन शर्तों के आधार पर किसी संस्थान को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया था, वह संस्थान बाद में भी उन शर्तों को पूरा कर रहा है या नहीं।
इसके साथ ही सरकार को समय-समय पर यह भी देखना चाहिए कि अल्पसंख्यक संस्थानों को कानून के तहत मिलने वाली रियायतों और सुविधाओं का इस्तेमाल नियमानुसार हो रहा है या नहीं। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इन सुविधाओं और लाभों का फायदा उन्हीं लोगों तक पहुंच रहा है, जिनके लिए ये प्रावधान किए गए हैं।
नए SOP से बदलेगी पूरी प्रक्रिया
बी. वेणुगोपाल रेड्डी की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट करीब एक महीने पहले मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल को सौंप दी थी। इसके बाद सरकार ने 15 जुलाई को अल्पसंख्यक कार्य सचिव माधवी खोडे चव्हाणे की अध्यक्षता में एक कार्यान्वयन समिति बनाई।
इस समिति का काम रेड्डी समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए ढांचा तैयार करना और अल्पसंख्यक दर्जा देने की संशोधित Standard Operating Procedure (SOP) तैयार करना है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह समिति अब तक दो बैठकें कर चुकी है और संशोधित SOP तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अल्पसंख्यक दर्जा देने के लिए नई SOP अगस्त के अंत तक जारी किए जाने की संभावना है।
कौन-कौन से विभाग होंगे नई समिति में?
एसओपी तैयार करने वाली कार्यान्वयन समिति में वित्त, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा और अल्पसंख्यक कार्य विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं।
यानी नई व्यवस्था में अल्पसंख्यक दर्जे के आवेदन की जांच केवल एक विभाग तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल करने की योजना है।
बी. वेणुगोपाल रेड्डी से संपर्क करने पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुके हैं। वहीं माधवी खोडे चव्हाणे ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की और बताया कि उसकी सिफारिशों को लागू करने का काम चल रहा है।
फरवरी में हुए विवाद के बाद बनी थी समिति
रेड्डी समिति का गठन इसी साल फरवरी में अल्पसंख्यक दर्जा देने वाले प्रमाणपत्रों को लेकर विवाद के बाद किया गया था। यह विवाद उन शैक्षणिक ट्रस्टों को लेकर उठा था, जो स्कूल और कॉलेज चलाते हैं।
विवाद तब सामने आया जब 20 में से 19 ट्रस्टों के अल्पसंख्यक दर्जे के प्रमाणपत्र 29 जनवरी से 4 फरवरी के बीच पोर्टल पर अपलोड किए गए। वहीं MahaIT पोर्टल पर तकनीकी समस्या के कारण 28 से 30 जनवरी के बीच प्रमाणपत्रों के एक साथ अपलोड किए जाने की अलग घटना भी सामने आई थी। इसके बाद प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए।
मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समीक्षा पूरी होने तक इन मंजूरियों को रोकने का आदेश दिया था। वहीं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने अल्पसंख्यक दर्जा देने की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे।
सरकार ने कहा था- मंजूरियां अनियमित नहीं थीं
हालांकि, अल्पसंख्यक विकास विभाग ने इन मंजूरियों में किसी तरह की अनियमितता से इनकार किया था।
द इंडियन एक्सप्रेस की पहले की रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग ने मुख्य सचिव को बताया था कि 28 से 30 जनवरी के बीच जारी किए गए दिखाई देने वाले ज्यादातर प्रमाणपत्र वास्तव में MahaIT पोर्टल की तकनीकी समस्या दूर होने के बाद अपलोड किए गए थे।
विभाग के अनुसार, 20 में से 19 ट्रस्टों के मामलों में सुनवाई और मंजूरी की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी। यह प्रक्रिया 24 दिसंबर 2025 से 27 जनवरी 2026 के बीच पूरी हुई थी। उस समय अजित पवार अभी पद पर थे।
अब रेड्डी समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार हो रही नई SOP से महाराष्ट्र में स्कूलों और कॉलेजों को अल्पसंख्यक दर्जा देने की पूरी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। अगर प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो आवेदन की जांच से लेकर मंजूरी और दर्जा मिलने के बाद तक संस्थानों की निगरानी के लिए पहले से कहीं ज्यादा व्यापक व्यवस्था होगी।
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