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OROP: पूर्व सैनिकों ने किया प्रदर्शन, कहा- मांग पूरी नहीं की गई तो…

पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की और एक रैंक एक पेंशन (ओआरओपी) अधिसूचना में ‘सुधार’ की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।

Author नई दिल्ली | January 4, 2016 2:09 AM
वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को पूरी तरह लागू करने की मांग को लेकर पिछले 320 दिनों से आंदोलन कर रहे पूर्व सैन्यकर्मियों ने अपने आंदोलन को आज रात निलंबित कर दिया।

पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की और एक रैंक एक पेंशन (ओआरओपी) अधिसूचना में ‘सुधार’ की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इस मुद्दे पर पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन का रविवार को 203वां दिन था। सेवानिवृत्त जनरल सतबीर सिंह ने कहा, ‘पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की और उन्हें बताया कि वास्तविक ओआरओपी प्रदान नहीं किया गया है। जारी अधिसूचना में गंभीर खामियां हैं और हमने उनसे उसमें सुधार और मंजूर परिभाषा के तहत वास्तविक ओआरओपी प्रदान करने का अनुरोध किया।’

उन्होंने कहा, ‘मंत्री ने हमें भरोसा दिया कि वे हमारी मांगों के बारे में रक्षा मंत्री से बात करेंगे।’ हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र के 100 पूर्व सैनिकों के एक समूह ने जेटली के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और उसके बाद यहां जंतर-मंतर चले गए।

प्रदर्शनकारियों में शामिल आरिफ अली खान ने कहा, ‘पिछले छह महीने से हमारे पूर्व सैनिक ओआरओपी की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया जा चुका है। यद्यपि सरकार हमारी मांगों को बार-बार नजरंदाज कर रही है। हमारा यह अनुरोध है कि हमें हमारा असली ओआरओपी दिया जाए।’

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उन्होंने कहा, ‘हमने 21 दिन पहले सरकार को नोटिस दिया था कि हम अभी तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। यद्यपि हमें अब जंतर-मंतर से आगे जाने को मजबूर किया गया है। अगर उन्होंने हमारी मांग अब नहीं सुनी तो हम अब यातायात, ट्रेन और सड़कें बाधित करने का सहारा लेंगे। जरू रत पड़ी तो हम संसद भी बाधित करेंगे।’

एक अन्य पूर्व सैनिक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कामेश्वर पांडेय ने कहा, ‘हमें लगता है कि हमारे साथ धोखा हुआ है क्योंकि यह असली ओआरओपी नहीं है जिसका वादा सरकार ने किया था। कोई भी संशोधन करने के लिए एक उचित संसदीय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। हम केवल चाहते हैं कि सरकार ऐसे किसी तिकड़म से बचे।’

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