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पूर्व आईपीएस को 10 दिन की रिमांड, पत्‍नी ने फेसबुक पोस्‍ट लिख जवाब में पढ़ी कविता

यहां आपको बता दें कि पुलिस ने संजीव भट्ट को बीते बुधवार को गिरफ्तार किया था। अब संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने अब अपने पति को लेकर एक फेसबुक पोस्ट लिखा है। इस पोस्ट में उन्होंने कविता के जरिए अपनी बात रखी है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट। (file photo)

गुजरात उच्च न्यायालय ने 22 साल पुराने ड्रग प्लांटिंग केस से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को मंगलवार को दस दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इससे पहले पालनपुर की मजिस्ट्रेट अदालत ने सीआईडी क्राइम की ओर से दायर रिमांड की याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका खारिज होने के बाद राज्य सरकार ने उच्च न्यायलय में इसको चुनौती दी थी। राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि इस मामले में उचित तरीके से जांच और पूछताछ करने के लिए आरोपियों के रिमांड की जरूरत है।

हालांकि अदालत में संजीव भट्ट के वकील ने रिमांड का पुरजोर विरोध भी किया। लेकिन दोनों तरफ से वकीलों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने संजीव भट्ट और मामले के अन्य आरोपियों को 12 से 21 सितंबर तक रिमांड पर भेज दिया। यहां आपको बता दें कि पुलिस ने संजीव भट्ट को बीते बुधवार को गिरफ्तार किया था। अब संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने अब अपने पति को लेकर एक फेसबुक पोस्ट लिखा है। इस पोस्ट में उन्होंने कविता के जरिए अपनी बात रखी है।

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क्या था मामला?
साल 1996 में संजीव भट्ट बनासकांठा में पुलिस अधीक्षक थे। उस वक्त बनासकांठा पुलिस ने करीब एक किलोग्राम अफीम रखने के आरोप में एक वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को पालनपुर के एक होटल से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि यह मादक पदार्थ राजपुरोहित के कमरे से मिली है। इस मामले में राजपुरोहित ने कहा था कि कुछ दबंग राजस्थान के पाली में उनकी विवादित संपत्ति को खाली करने का दबाव बना रहे हैं। इस संपत्ति को खाली कराने के लिए जानबूझ कर पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है और उन्हें झूठे केस में फंसाया जा रहा है।

इस शिकायत के बाद गुजरात उच्च न्यायालय ने जून में इस मामले को सीआईडी के हवाले कर दिया था। सीआईडी की जांच तीन महीने तक चली थी। जांच में इस बात का खुलासा हुआ था कि संजीव भट्ट और अन्य लोगों ने मादक पदार्थ रखकर राजपुरोहित को गिरफ्तार करने की साजिश रची ताकि दवाब में आकर वो विवादस्पद संपत्ति से अपना दावा खत्म कर दें। यहां आपको बता दें कि आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को साल 2015 में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की वजह से केंद्र सरकार की ओर से बर्खास्त कर दिया गया था।

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