हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के वरिष्ठ नेता दुष्यंत चौटाला ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि जब वह हिसार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिद्धांत जैन से मिलने जा रहे थे तो हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी ने उनकी गाड़ी का रास्ता रोका और उन पर पिस्तौल तान दी।
यह कथित घटना हिसार के सब्जी मंडी चौक पर घटी। दुष्यंत और उनके समर्थक 16 अप्रैल को गुरु जंबेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (जीजेयूएसटी) में विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामले में जेजेपी कार्यकर्ताओं की कथित गलत गिरफ्तारी के सिलसिले में एसपी से मिलने जा रहे थे।
घटना के वीडियो भी आए सामने
वीडिया में दिख रहा कि पुलिस की गाड़ी ने दुष्यंत की कार को रोक रखा है। एक अन्य वीडियो में दुष्यंत हरियाणा पुलिस की गाड़ी में घुसने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। हालांकि ड्राइवर ने गाड़ी चला ली और दुष्यंत गाड़ी के किनारे पायदान पर खुद को संभालते नजर आए।
हिसार से पूर्व सांसद दुष्यंत ने आरोप लगाया, “सब्जी मंडी पुल के पास एक पुलिस गाड़ी ने मुझे रौंदने की कोशिश की और एक सादे कपड़ों में अधिकारी, जो इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी लग रहा था, जिसका नाम पवन है और हिसाल के क्राइम ब्रांच में काम करता है, ने मुझ पर पिस्तौल तान दी। यह पुलिस का व्यवहार नहीं बल्कि किसी गुंडे का है।”
दुष्यंत के भाई ने लगाए ये आरोप
दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय सिंह चौटाला समेत कई जेजेपी कार्यकर्ताओं के नाम यूनिवर्सिटी के कैंपस परिसर के तोड़फोड़, जबरन घुसपैठ और अन्य गतिविधि मामले में एफआईआर में दर्ज हैं। पुलिस ने छह जेजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।
दिग्विजय ने आरोप लगाया कि पुलिस जेजेपी नेता तरूण गोयल के घर रात के 3 बजे बिना किसी महिला अधिकारी के पहुंची और उसकी पत्नी के साथ बदतमीजी करते हुए धक्का दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पुलिस पूर्व जेजेपी प्रत्याशी रवि अहूजा और बिजेंद्र धनक के घर पहुंचा तो छापेमारी के दौरान सीसीटीवी के डीवीआर को भी हटा दिए।
इस घटना के बाद दुष्यंत और दिग्विजय एसपी से मिले और कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे प्रदर्शन करेंगे।
एसपी सिद्धांत जैन ने कहा, हमने उनका पक्ष सुना। दुष्यंत चौटाला की ओर से लिखित शिकायत मिलने पर कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी। गुरु जंबेश्वर यूनिवर्सिटी की घटना में पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के मामले में प्रथम दृष्टया घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यूनिवर्सिटी अधिकारियों की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच चल रही है और जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक एक्शन लिया जाएगा।
आयोजन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी
16 अप्रैल को जेजेपी की युवा शाखा यूनिवर्सिटी में एक युवा सम्मेलन आयोजित करना चाहती थी, लेकिन कुलपति नरसी राम विश्नोई ने परमिशन नही दिया। इसके बाद जेजेपी ने पास के एक आयोजन स्थल पर कार्यक्रम आयोजित किया। गुरुवार को जब दिग्विजय वहां पहुंचे तो उन्होंने छात्रों को संबोधित किया और परमिशन न मिलने पर नाराजगी व्यक्त की और वीसी ऑफिस के घेराव की घोषणा की। इसके बाद छात्र और जेजेपी कार्यकर्ताओं ने वीसी कार्यालय तक मार्च किया और कथित तौर पर हंगाम किया।
इसके बाद जब पुलिस ने कार्यकर्ताओं और छात्रों के समूह को वीसी से बात करने से रोका तो गुस्साए छात्रों ने कथित तौर पर उनके कार्यालय का दरवाजा तोड़ दिया और गमलों को फेंक दिया। घटना के समय दिग्विजय मौजूद थे।
कुलपति ने रखा पक्ष
कुलपति नरसी राम विश्नोई ने कहा, “पुलिस को प्रदर्शन के बारे में पहले ही खबर दे दी गई थी। सुरक्षा में चूक हुई इससे प्रदर्शनकारी गेट पर रुकने के बजाए ऑफिस तक आ गए। कुछ लोग विरोध के नाम पर गुंडागर्दी करने आए और कोई भी मांग नहीं की। पहले से बुकिंग कार्यक्रम स्थल उपलब्ध नहीं था,जिस बारे में छात्रों को पहले ही बता दिया गया था।”
सरकार पर लगाए आरोप
राज्य सरकार पर आधिकारिक मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए, दुष्यंत ने कहा, “एफआईआर में सबसे पहले दिग्विजय चौटाला का नाम है। दिग्विजय को कभी भी जेल जाने का डर नहीं थी और अब भी नहीं डरेंगे क्योंकि वह सरकार के खिलाफ आवाज मुखर कर रहे हैं। हम आज एसपी आफिस में अपनी गिरफ्तारी देने गए थे। 20 मिनट तक किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब एसपी ने हमें बताया कि जब पुलिस कल हमारे बयान दर्ज करेगी तो वह हमें जानकारी देंगे।”
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