वो CM जो अपने ही खिलाफ छपवाता था खबरें, सिर्फ एक दस्तखत से 117 बन गए थे करोड़पति

अपने ही खिलाफ खबरें प्लांट करवाने के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का अलग ही उद्देश्य हुआ करता था, कई बार उन्हें इसका फायदा मिलता था लेकिन कई बार उन्हें इसका नुकसान भी बर्दाश्त करना पड़ता था।

Arjun Singh
सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के साथ अर्जुन सिंह (मध्य में)। Photo Source- Reuters

राजनीति की दुनिया से जुड़ी खबरें उन्हीं गलियारों से निकलती हैं, जहां सियासतदान चहलकदमी किया करते हैं, विरोधियों के खिलाफ जानकारी लीक कराने का प्रचलन तो पुराना रहा है लेकिन अपने ही खिलाफ खबरें प्लांट करवाने वाले भी विरले ही होते हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बारे में कुछ ऐसा ही कहा जाता था। कई बार वह अपने मित्र पत्रकारों से अपने ही खिलाफ खबरें छापने को कहते थे। कई सूचनाएं तो वह खुद ही पत्रकारों तक पहुंचाते थे।

रामशरण जोशी, अपनी किताब ‘अर्जुन सिंह: एक सहयात्री इतिहास का’ में लिखते हैं कि अपने ही खिलाफ खबरें छपवाने के पीछे अर्जुन सिंह का उद्देश्य उन जानकारियों का पता लगाना होता था, जो अधिकारी किसी संकोच के कारण उन तक नहीं पहुंचाते थे। अपने ही खिलाफ खबर लिखवाने के बाद वह उन कमियों की जड़ों तक पहुंच जाते थे, जिसकी जानकारी उन तक पहुंचने से रोकी जाती थी। लेकिन कई बार उनका यह स्टाइल उन्हीं के खिलाफ भारी पड़ जाता था, क्योंकि विरोधियों को बैठे बिठाए मुद्दे मिल जाया करते थे।

अर्जुन सिंह को इस बात का अहसास था कि पत्रकारों के लिए विश्वसनीयता कितनी अहम होती है, लिहाजा वह किसी पत्रकार को खबर देने से पहले अपने स्तर से जांचा परखा करते थे। उन्हें कम बोलने और ज्यादा सुनने की भी आदत थी, ऐसे में उनके पास जानकारियां ज्यादा हुआ करती थीं लेकिन उनका जिक्र वह जरूरी जगहों पर ही किया करते थे। किताब में रामशरण लिखते हैं वह लोगों पर जमकर उपकार करते थे और समय आने पर उसका इस्तेमाल भी करते थे।

सिर्फ एक दस्तखत से 117 लोग बन गए थे करोड़पति: रामशरण जोशी अपनी किताब में लिखते हैं कि अर्जुन सिंह का युग मध्य प्रदेश में पत्रकारों का स्वर्णिम युग कहा जाता था। सैकड़ों पत्रकारों को सरकारी मकानों से लेकर प्रिंटिग यूनिट स्थापित करने के लिए प्रेस कांपलेक्स का निर्माण करवाना एतिहासिक कदम करार दिया जाता था। सीनियर पत्रकार डॉ सुरेश मल्होत्रा ने लेखक रामशरण जोशी को बताया कि उस दौरान एक बात बहुत प्रचलित थी कि कैसे अर्जुन सिंह के एक दस्तखत से 117 लोग करोड़पति बन गए थे। वह बताते हैं कि सिंह ने 117 छोटे-बड़े समाचार पत्रों को पूरे मध्य प्रदेश में शासकीय जमीन आवंटित की थी। उसी का नतीजा है कि आज कई बड़े शहरों में प्रेस कांपलेक्स हैं।

अर्जुन सिंह का किताबों और अखबारों के प्रति प्रेम का किस्सा भोपाल में पली बढ़ीं एक्ट्रेस जया बच्चन बताया करती हैं, जब जब अर्जुन सिंह उनके घर आया करते थे तो उनके पिता तरुण भादुड़ी (पत्रकार और लेखक) का सख्त निर्देश होता था कि उन लोगों को डिस्टर्ब न किया जाए क्योंकि कुछ गोपनीय चर्चा की जा रही है। कुछ देर बाद जब जया बच्चन चाय और नाश्ता लेकर जाती थीं तो देखती थीं कि कमरे में चारों तरफ सन्नाटा है, एक तरफ अर्जुन सिंह एक अखबार पढ़ रहे होते थे तो दूसरी तरफ उनके पिता तरुण भादुड़ी दूसरे अखबार की खबरों में खोये रहते थे।

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