उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विद्युत चालित (इलेक्ट्रिक) और हाइब्रिड वाहनों को लेकर बुने गए सुनहरे सपने अब धरातल पर हांफते नजर आ रहे हैं। सब्सिडी योजना समाप्त होते ही बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई। पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब जिले में प्रभावहीन होती नजर आ रही है।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 के बीच, जब सब्सिडी प्रभावी थी, तब जिले में वाहनों के पंजीकरण में तेजी देखी गई। इस अवधि में करीब 5240 वाहनों का पंजीकरण हुआ, जिनमें लगभग चार हजार हाइब्रिड वाहन शामिल थे। उस समय सरकार ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया था।

हालांकि, अक्टूबर 2025 में हाइब्रिड वाहनों पर सब्सिडी समाप्त होते ही स्थिति बदल गई। हाइब्रिड वाहनों की मांग में अचानक गिरावट आई, जिसका असर इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी पड़ा। फरवरी 2026 तक इलेक्ट्रिक वाहनों से भी सब्सिडी हटा ली गई, जिसके बाद पंजीकरण के आंकड़े और गिर गए। अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल पंजीकरण घटकर लगभग 2000 रह गया, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या केवल 1189 दर्ज की गई।

वाहनों की मांग अपेक्षाकृत कमजोर

यह गिरावट दर्शाती है कि सरकारी प्रोत्साहन के बिना इन वाहनों की मांग अपेक्षाकृत कमजोर है। स्थानीय ऑटोमोबाइल शोरूम संचालकों का कहना है कि अब ग्राहक मुख्य रूप से जानकारी लेने आते हैं, लेकिन खरीदारी से बच रहे हैं।

कई संभावित खरीदार पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की ओर लौटते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे चार्जिंग स्टेशन और दीर्घकालिक नीति समर्थन के अभाव में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार अभी पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। ऐसे में केवल सब्सिडी आधारित मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकता।

इस संबंध में उप संभागीय परिवहन अधिकारी नंद कुमार ने कहा कि विद्युत चालित और हाइब्रिड वाहनों पर लोगों ने जमकर सब्सिडी का लाभ उठाया है। अब केवल ईवी के पंजीकरण शुल्क पर छूट है तो ऐसे में लोग अभी भी सुविधा का लाभ ले रहे हैं।

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