ऐलनाबाद : हार के बाद भी भाजपा उत्साहित, कांग्रेस में दिखी गुटबाजी

ऐलनाबाद उपचुनाव में इनेलो प्रत्याशी अभय चौटाला ने जीत दर्ज कर अपने गढ़ को सुरक्षित रखा, तो हार के बावजूद भाजपा पूरी तरह उत्साहित है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सैलजा।

संजीव

ऐलनाबाद उपचुनाव में इनेलो प्रत्याशी अभय चौटाला ने जीत दर्ज कर अपने गढ़ को सुरक्षित रखा, तो हार के बावजूद भाजपा पूरी तरह उत्साहित है। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी पवन बेनीवाल की जमानत जब्त होने से एक बार फिर कांग्रेस में गुटबाजी उभरकर सामने आई है। किसानों में अति विश्वास इनेलो के लिए घातक सिद्ध हुआ और जीत का अंतर वर्ष 2019 की बजाय उपचुनाव में आधा रह गया। इसके साथ ही उपचुनाव से कृषि कानूनों का मुद्दा भी गौण हो गया। इनेलो अपने गढ़ को बचाने में जरूर कामयाब रही, लेकिन भाजपा प्रत्याशी के खाते में आए वोटों को देखकर भाजपा पूरी तरह उत्साहित है, विरोध के बावजूद भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर है और कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में भी नाकाम रहा।

ऐलनाबाद उपचुनाव के प्रदेश की राजनीति में कई मायने निकाले जा रहे हैं। पहला है इनेलो की जीत, दूसरा है भाजपा का दूसरे नंबर पर आना और किसान हितैषी होने का दम भरने वाली कांग्रेस के प्रत्याशी की जमानत जब्त। कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त होने से सैलजा व हुड्डा की आपसी गुटबाजी फिर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ऐलनाबाद में स्टार प्रचारक के तौर पर प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगने जरूर गए, लेकिन उन्होंने ऐलनाबाद की बजाय हिमाचल को ज्यादा तरजीह दी। यही नहीं, हुड्डा ने प्रचार के दौरान भाजपा और इनेलो प्रत्याशी के साथ मित्रता का जिक्र करके कांग्रेस प्रत्याशी की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि उन्होंने प्रचार के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी का ख्याल रखने की बात जरूर दोहराई।
जब पिता-पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी का नाम लेना भूले

ऐलनाबाद उपचुनाव में कांग्रेस की गुटबाजी उस समय जगजाहिर हुई, जब प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा कांग्रेस प्रत्याशी का नाम लेना ही भूल गए। उन्होंने अपने समर्थित विधायकों व पूर्व विधायकों के साथ प्रचार के बहाने शक्ति प्रदर्शन करने का भी काम किया।
भाजपा का प्रबंधन बेहतर साबित
भाजपा ने ऐलनाबाद के किले को फतेह करने के लिए पूरी मेहनत की। तमाम मंत्रियों से लेकर दिग्गज नेताओं ने प्रचार किया। अंतिम समय में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चुनावी कमान संभाली और माहौल को पूरी तरह बदल दिया। यही कारण रहा कि भाजपा प्रत्याशी जीत के करीब पहुंच गए और इसका नुकसान इनेलो को उठाना पड़ा। इनेलो प्रत्याशी अभय चौटाला की जीत का अंतर भी घट गया।

हुड्डा और सैलजा की दिखी गुटबाजी
वर्ष 2019 में ऐलनाबाद से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले पवन बेनीवाल, उपचुनाव से एक महीने पहले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा की अगुआई में कांग्रेस में शामिल हुए। सैलजा ने बेनीवाल को टिकट दिलवाने में भी अहम भूमिका निभाई। टिकट को लेकर किसी और का हस्तक्षेप नहीं रहा, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी कसक पूरी की।

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