ताज़ा खबर
 

हाथियों के हमले में दो दिन में दो लोगों की मौत

उत्तराखंड के राजाजी राष्ट्रीय पार्क से सटे हुए गांवों और बस्तियों में जंगली हाथियों ने आतंक मचा रखा है।

Author देहरादून | January 18, 2018 01:59 am
(rajaji national park)

उत्तराखंड के राजाजी राष्ट्रीय पार्क से सटे हुए गांवों और बस्तियों में जंगली हाथियों ने आतंक मचा रखा है। पार्क की रानीपुर रेंज की सीमा से सटी बीएचईएल की कालोनी में जंगली हाथियों ने दो दिन में दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया। बीते दो साल में जंगली हाथियों ने अबतक 8 लोगों की जान ली है। हरिलार में बीएचईएल कारखाने की कालोनी में जंगली हाथियों ने बीते एक हफ्ते से खौफ पैदा किया हुआ है । देर शाम को बीएचईएल से सटे टिबड़ी के जंगल से हाथियों का झुंड बीएचईएल की कालोनी में घुस गया और पूरी रात उत्पात मचाया। सुबह 6 बजे तक हाथियों के झुंड बीएचईएल की कालोनियों में घूमते रहते हैं। बीती सुबह छह बजे के करीब सुबह की सैर करने गए बीएचईएल के विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ रजनीकांत शुक्ला के ऊपर जंगली हाथी ने जानलेवा हमला किया। वे बाल बाल बच गए और उनके शरीर मे कई स्थानों पर चोटें आईं।

बीएचईएल की कालोनी में रह रहे लोग जंगली हाथियों के हमलों से बुरी तरह घबराये हुए हैं। शाम होते ही कालोनी के लोग डर के मारे घरों में दुबक जाते हैं और सुबह होने तक घरों से बाहर नही निकलते हैं। डॉ रजनीकांत शुक्ला का कहना है कि जंगलों में पेड़ कटने के कारण हाथियों को चारा नहीं मिल पा रहा है जिस कारण से हाथी बस्तियों और खेतों की तरफ चारे के लिए आते हैं। भूख से गुस्साए हाथी खेतों की फसलों को बरबाद कर रहे हैं और उन्हें रास्ते में जो भी आदमी दिखाई देता है उस पर वे जानलेवा हमला कर देते हैं ।

राजाजी राष्ट्रीय पार्क की रानीपुर, धौलखंड, कांसरों ,मोहंड रेंज से सटी बस्तियों, गांवों और खेतों में जंगली हाथियों ने सबसे ज्यादा उत्पात मचाया हुआ है। पथरी, शाहपुर, जगजीतपुर, फेरुपुर, मिसरपुर, बुग्गावाला समेत दो दर्जन से ज्यादा गांवों में जंगली हाथियों ने गन्ने, गेहूं और सरसों की फसलों को रौंद डाला है। ग्रामीणों ने कई दफा वन विभाग के आला अधिकारियों को शिकायत भी की परंतु वन विभाग ने जंगली हाथियों से बचाव के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जिससे गांव वालों में बेहद गुस्सा है । वहीं राजाजी राष्ट्रीय पार्क के वन्य जीव प्रतिपालक कोमल सिंह का कहना कि जंगलों में मानवीय दखल के चलते जंगली हाथी बेहद परेशान हैं और वह इंसानों से बुरी तरह चिड़े हुए हैं। गांवो में 18 से 20 साल की उम्र वाले हाथी खेतों और बस्तियों में हमला कर रहे हैं।

कोमल सिंह के मुताबिक जंगली हाथियों से बचाव के लिए राजाजी राष्ट्रीय पार्क की सीमा में चारदीवारी का काम शुरू किया गया है और कुछ स्थानों पर खाई खोदी जा रही है तथा जंगल मे हाथियों के लिए बने पानी के स्रोतों में गन्ने और सेन्धा नमक के रखे जाने का इंतजाम किया जा रहा है। जंगलों की सीमा में वन सुरक्षा कर्मियों की रात्रि गश्त बढ़ाई जा रही है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App