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पश्चिम बंगाल: इंसान और हाथी के बीच टकराव के मामले खतरनाक स्तर पर: वन विभाग

2015-16 में राज्य में जंगली हाथियों ने 108 लोगों को मार डाला था और 95 लोगों को घायल कर दिया था।
Author कोलकाता | July 8, 2016 14:05 pm
(file photo)

वर्ष 2015-16 में जंगली हाथियों के शिकार बने 108 लोगों की मौत देख चुके पश्चिम बंगाल में इंसान और हाथी के बीच के संघर्ष के ‘खतरनाक’ स्तर पर पहुंच जाने पर पश्चिम बंगाल वन विभाग ने इससे निपटने के लिए एक दो स्तरीय तरीका तैयार किया है।  वनों के प्रधान मुख्य संरक्षणकर्ता प्रदीप व्यास ने कहा, ‘‘वर्ष 2015-16 में राज्य में जंगली हाथियों ने 108 लोगों को मार डाला था और 95 लोगों को घायल कर दिया था। इन 108 लोगों में से 71 को दक्षिण बंगाल में मारा गया था। इन घटनाओं में कुल 14 हाथी मारे गए हैं। हम बंगाल में एक खतरनाक स्थिति पर पहुंच चुके हैं।’’

उन्होंने कहा कि वन विभाग ने राज्य में इंसान और हाथी के इस संघर्ष से निपटने के लिए एक दो स्तरीय ‘‘संपूर्ण तरीका’’ अपनाया है। व्यास ने कहा, ‘‘इस मुद्दे से निपटने के लिए हमारे पास दो तरीके हैं – अल्पकालिक और दीर्घकालिक। अल्पकालिक में, हम रोजाना राज्य में हाथियों की आवाजाही पर निगार रख रहे हैं। किसी भी इंसान या वन्यजीव को पहुंचने वाली चोट पर रोजाना के आधार पर निगाह रखी जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘दूसरा, हमने हाथी आवाजाही समन्वय समिति बनाई है, जो पहले नहीं थी। इसकी अध्यक्षता दो प्रमुख संरक्षक कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह समिति नियमित रूप से पश्चिम बंगाल के दक्षिण में हाथियों की आवाजाही पर निगाह रखती है और यह सुनिश्चित करती है कि इनके आने-जाने में बेवजह की कोई बाधा न आए। क्योंकि यदि हाथियों को बार-बार रोका जाता है तो वे चिढ़ सकते हैं और यह संघर्ष बढ़ सकता है।’’

व्यास ने कहा, ‘‘समिति पिछले दो माह से बढ़िया ढंग से काम कर रही है। इसने 70-80 हाथियों को झारखंड वापस भेजना सुनिश्चित किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम दो हाथी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र बना रहे हैं, एक उत्तर बंगाल में और दूसरा दक्षिण बंगाल में। जो हाथी बेहद गुस्सैल हैं, उन्हें पकड़ा जाएगा और इन केंद्रों में रखा जाएगा। इन केंद्रों में उन्हें जंगल जैसी स्थितियों में ही रखा जाएगा।’’

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