केंद्र सरकार के इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को लेकर देशभर के बिजली कर्मचारियों में गहरी नाराजगी उभर कर सामने आ गई है। बिजली कर्मियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस बिल को संसद के आगामी बजट सत्र में लाने या पारित कराने की कोशिश करती है, तो इसका देशव्यापी विरोध किया जाएगा।

दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा का फैसला

बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश से जुड़े केंद्रीय पदाधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा की एक संयुक्त बैठक हुई। इस बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि बिजली के निजीकरण और संशोधित बिजली कानून के खिलाफ अब संघर्ष को और तेज किया जाएगा। नेताओं का कहना है कि जरूरत पड़ी तो 25 करोड़ से ज्यादा किसान, मजदूर, बिजली कर्मचारी और अभियंता एक साथ सड़कों पर उतरेंगे।

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मंगलवार देर रात हुई एक अहम ऑनलाइन बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकार अगर बिजली क्षेत्र में निजीकरण को जबरन आगे बढ़ाने की कोशिश करती है, तो तुरंत लाइटनिंग एक्शन लिया जाएगा। बैठक में एटक, इंटक, सीटू, हिन्द मजदूर सभा, एआईयूटीयूसी, यूटीयूसी और संयुक्त किसान मोर्चा के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि बिजली जैसे जरूरी सार्वजनिक क्षेत्र को मुनाफे के हवाले नहीं किया जा सकता।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन और संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी पिछले 427 दिनों से लगातार निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का टेंडर जारी किया गया, वैसे ही सामूहिक जेल भरो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

बिजली कर्मियों ने केंद्र सरकार को यह भी बता दिया है कि 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल की जाएगी। इस संबंध में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को औपचारिक नोटिस सौंपा जा चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि यह सिर्फ उनकी नौकरी का नहीं, बल्कि आम जनता के सस्ते और सुरक्षित बिजली अधिकार का सवाल है।

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगों में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पूरी तरह वापस लेना, निजीकरण और मल्टी-लाइसेंसिंग की नीति रोकना, शांति अधिनियम 2025 को रद्द करना और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 को खत्म करना शामिल है। बिजली कर्मचारियों का साफ कहना है कि अगर सरकार ने उनकी आवाज नहीं सुनी, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।

क्या होता है लाइटनिंग एक्शन

लाइटनिंग एक्शन का मतलब अचानक, तेज और बिना लंबी पूर्व सूचना के किया गया विरोध या कार्रवाई होता है। जब कोई संगठन पहले से लंबा आंदोलन घोषित न करके तुरंत प्रतिक्रिया के तौर पर छोटे समय में बड़ा असर डालने वाली कार्रवाई करता है तो उसे लाइटनिंग एक्शन कहा जाता है। आम तौर पर लाइटनिंग एक्शन में अचानक धरना या प्रदर्शन, काम रोकना या प्रतीकात्मक हड़ताल, कार्यालयों का घेराव, ज्ञापन सौंपना, जेल भरो या सामूहिक गिरफ्तारी की घोषणा आदि शामिल होता है।