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पांच राज्यों के चुनावों ने दिया आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय दल बनने का मौका

दिल्ली में लगातार दो चुनाव में रेकार्ड जीत हासिल करने के बाद दो महीने में होने वाले देश के पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव ने आम आदमी पार्टी (आप) को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में स्थापित होने का मौका मिला है।

अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान। फाइल फोटो।

मनोज कुमार मिश्र

दिल्ली में लगातार दो चुनाव में रेकार्ड जीत हासिल करने के बाद दो महीने में होने वाले देश के पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव ने आम आदमी पार्टी (आप) को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में स्थापित होने का मौका मिला है। संयोग से दस फरवरी से सात मार्च, 2022 तक चलने वाले विधानसभा चुनाव जिन राज्यों में है, उनमें पंजाब में उसे सत्ता का दावेदार माना जा रहा है। अपने वायदे के अनुरूप ‘आप’ के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के संगरूर से दूसरी बार सांसद बने भगवंत मान को पंजाब में अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। गोवा और उत्तराखंड में ‘आप’ की तैयारी मुख्य मुकाबले में आने की है। वहीं देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में वह अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाने में लगी हुई है।

इन राज्यों में शासन करने वाले दलों से कम किसी मायने में ‘आप’ की चुनावी तैयारी नहीं है। उत्तर प्रदेश काफी बड़ा राज्य है और उस राज्य में अनेक दल पहले से स्थापित हैं। बावजूद इसके ‘आप’ हर मुद्दे पर सक्रिय होकर अपनी दावेदारी बनाए हुए है। अयोद्या में कथित जमीन घोटाले का आरोप लगाकर ‘आप’ चर्चा में आई। दिल्ली के बाद ‘आप’ को दूसरी सफलता पंजाब में मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में उसे चार सीटें मिलीं। चारों पंजाब की थीं। बाद में दो सांसद ‘आप’ से अलग हो गए और 2019 के लोकसभा चुनाव में उसे एक सीट ही मिल पाई।

2017 के विधानसभा चुनाव में ‘आप’ को सत्ता तो नहीं मिली लेकिन वह मुख्य विपक्षी दल बन गया। उस चुनाव में यह वातावरण बन गया था कि शिरोमणि अकाली दल के दस साल के शासन से पंजाब की जनता नाराज है और कांग्रेस कमजोर है, इसलिए ‘आप’ की जीत होगी। लेकिन चुनाव के आखिरी समय में ‘आप’ को मिलने वाले विदेशी समर्थन को कांग्रेस आतंकवाद से जोड़ने में कामयाब हो गई। दूसरे ‘आप’ ने कोई स्थानीय चेहरा मुख्यमंत्री के लिए नहीं पेश किया। जीत कैप्टन अमरेंदर सिंह की अगुआई में कांग्रेस की हुई।

इस बार माहौल बदला हुआ है। 35 सदस्यों वाली चंडीगढ़ नगर निगम में पहली बार चुनाव लड़कर ‘आप’ ने सबसे ज्यादा 14 सीटें जीतने के बावजूद अपना मेयर न बनवा पाने के बाद भी ‘आप’ के हौसले बुलंद हैं। पिछले अनुभव के कारण अरविंद केजरीवाल ने ‘आप’ के विधानसभा चुनाव जीतने पर किसी ‘सिख’ नेता को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की थी। उसी के अनुरूप उन्होंने 18 जनवरी को प्रदेश के आप के संयोजक और संगरूर से सांसद भगवंत मान को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया। वे सिख हैं और दूसरी बार सांसद बने हैं। पंजाब में पहले 14 फरवरी को मतदान होना था लेकिन सभी राजनीतिक दलों के अनुरोध पर चुनाव आयोग ने उसे बढ़ाकर 20 फरवरी कर दिया है।

जिस बिजली-पानी मुफ्त करने के बूते दिल्ली में भारी जीत पाई, उसे ही चुनाव होने वाले सभी राज्यों में केजरीवाल लगातार दुहरा रहे हैं। दिल्ली में तो दो सौ यूनिट तक बिजली और बीस हजार लीटर हर महीने पानी का उपभोग करने वाले लिए दोनों सेवाएं मुफ्त की गई। विधानसभा होने वाले दूसरे राज्यों में उन्होंने हर महीने तीन सौ यूनिट उपयोग करने वाले को मुफ्त बिजली देने का वायदा कर रहे हैं। इसके अलावा छह महीने में हर राज्य के लिए कोई न कोई घोषणा की गई। राज्यों के घोषणापत्र तो बाद में जारी होने वाले हैं। ‘आप’ ने तो कई राज्यों में अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए।

‘आप’ ने दिल्ली के बाद पंजाब के साथ-साथ गोवा में अपनी पार्टी का विस्तार मजबूती के किया था लेकिन उसे चुनाव में कोई सफलता नहीं मिली। गोवा को दिल्ली जैसा छोटा राज्य मान कर ‘आप’ के नेता वहां अपनी सक्रियता लगातार बनाए रखे। उत्तराखंड में इस बार ‘आप’ भी मजबूती से चुनाव मैदान में है। उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों की बड़ी तादात होने के कारण आप ने कर्नल (रिटायर) अजय कोठियाल को अपना मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पंजाब के बाद पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का सबसे ज्यादा दौरा उत्तराखंड में हुआ है। भले ही ‘आप’ नंबर एक पार्टी न बन पाए लेकिन चुनाव को वह कांग्रेस बनाम भाजपा नहीं रहने देने वाली है।

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