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दिग्गज दंगल राजस्थानः विकास और मुद्दे गायब, महारथियों से आस

जोधपुर में उम्मीदवारों के बजाय कांग्रेस में मुख्यमंत्री गहलोत और भाजपा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामों का ही जलवा चल रहा है। ऐसे में जोधपुर संसदीय क्षेत्र में एक तरह से चुनावी जंग गहलोत बनाम मोदी बन गई है। इन दो बड़े नामों के बीच मचे चुनावी घमासान में मुददे गायब हो गए हैं। कांग्रेस हालांकि जोधपुर को स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं करने को मुददा बना रही है। भाजपा राष्ट्रवाद और हवाई हमले के साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से चलाई गई कल्याणकारी योजनाओं को उठा रही है। इस सबके बावजूद जनता के बीच तो गहलोत बनाम मोदी ही मुददा बने हुए हैं।

जोधपुर सीट से कांग्रेस ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को मैदान में उतारा है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दूसरी बार सांसद बनने के लिए मैदान में हैं।

राजीव जैन

राजस्थान में इस बार जोधपुर की सीट पर सबसे ज्यादा निगाह है। इस सीट से कांग्रेस ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को मैदान में उतारा है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दूसरी बार सांसद बनने के लिए मैदान में हैं। जोधपुर सीट पर मुख्यमंत्री गहलोत की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। गहलोत खुद इस सीट से पांच बार सांसद रहे हैं और अभी तीसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए गहलोत ने जोधपुर के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी। इसको लोग अभी भी मानते हैं।

जोधपुर शहर की सबसे बड़ी पेयजल समस्या का समाधान गहलोत ने ही किया। प्रदेश के अन्य शहरों में भले ही पीने के पानी की मारामारी हो पर जोधपुर के लोगों को भरपूर पेयजल मिलता है। गहलोत के लिए जोधपुर सीट का महत्व इसी से जाना जा सकता है कि नामांकन के बाद उन्होंने इलाके के कई दौरे किये है। गहलोत ने छोटी छोटी सभाओं के जरिये मतदाताओं को साधने का काम भी किया है। गहलोत का कहना है कि भाजपा के धोखे में अब जनता आने वाली नहीं है। भाजपा राष्ट्रवाद के जरिये भावनात्मक मुददों को उठा कर लोगों को भ्रमित करना चाहती है।

भाजपा के प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत ने केंद्र में मंत्री रहते हुए जोधपुर से लगातार संपर्क बनाए रखा। इसके साथ ही शेखावत के साथ पूरा संघ परिवार लगा हुआ है। शेखावत का कहना है कि उनका चुनाव तो प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही लड़ा जा रहा है। मोदी सरकार ने देश में जो उल्लेखनीय काम किए हैं, उनकी बदौलत एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनना तय है। जोधपुर के लिए उनके सांसद कार्यकाल में कई विकास के काम हुए। उन्होंने इस आरोप को गलत करार दिया कि भाजपा सरकार ने जोधपुर के साथ भेदभाव बरता। जोधपुर की जनता एक बार फिर से भाजपा को जिताएगी।
भाजपा के गजेंद्र सिंह शेखावत ने पिछला चुनाव 4 लाख 10 हजार वोटों के भारी अंतर से जीता था। कांग्रेस को इस अंतर को पाटने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। व्यास का कहना है कि चुनाव के मुददे तो बड़े नामों मोदी और गहलोत के कारण हवा ही हो गए हैं। जोधपुर की जनता भी इसे गहलोत और मोदी के बीच का ही चुनाव मान रही है।

जोधपुर के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश चंद्र व्यास का कहना है कि मुख्यमंत्री के पुत्र के चुनाव लड़ने से माहौल ही अलग तरह का हो गया है। जोधपुर संसदीय सीट पर जातीय समीकरणों के हिसाब से तो दोनों उम्मीदवारों के बीच बराबरी का ही मुकाबला है। जोधपुर में पिछली दफा 62 फीसद से ज्यादा मतदान हुआ था। इस बार इसको कायम रखने के लिए दोनों दल पूरा जोर लगा रहे हैं। जोधपुर में इस बार 10,10,362 पुरुष और 9,18,940 महिला मतदाता हैं। लोकसभा का 2014 का चुनाव गजेंद्र सिंह ने कांग्रेस की पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रेश कुमारी को हरा कर जीता था। लोकसभा का 2009 का चुनाव कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी ने भाजपा के जसवंत सिंह विश्नोई को 98324 वोटों के अंतर से हरा कर जीता था। चंद्रेश कुमारी उस समय मनमोहन सिंह की सरकार में केबिनेट मंत्री भी बनी थीं। राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव में इस संसदीय सीट की आठ विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने छह और भाजपा ने दो सीटें जीती हैं।

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