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साइकिल की सवारी कौन करेंगे मुलायम सिंह या अखिलेश यादव, चुनाव आयोग में फैसला सुरक्षित

साइकिल नहीं मिलने की स्थिति में अखिलेश गुट जहां साइकिल से मिलते-जुलते नाम जैसे मोटरसाइकिल की मांग करेगा वहीं मुलायम सिंह गुट ने राष्ट्रीय लोकदल के चुनाव चिह्न (हल जोतता किसान) को अपनाने की तैयारी कर रखी है।
SP UP Election Candidates List: अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव। (फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बीच उसके चुनाव चिह्न साइकिल पर कौन सा गुट सवारी करेगा इस पर चुनाव आयोग ने आज (शुक्रवार को) दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। माना जा रहा है कि चुनाव नजदीक होने की वजह से आयोग अब एक-दो दिन में अंतिम फैसला सुना देगा। हालांकि, अंतिम फैसला सुनाने से पहले आयोग अब कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों की राय लेगा। इसके बाद भी अगर स्थिति नहीं सुलझी तो आयोग समाजवादी पार्टी के नाम और निशान को फ्रीज कर दोनों दलों को नए नाम और निशान का विकल्प देगा।

इस बीच दोनों धड़ों में सुलह की कोशिशें भी जारी हैं। खबर है कि अखिले्श यादव ने बीती रात मुलायम सिंह यादव से काफी देर तक विचार-विमर्श किया है। माना जा रहा है कि दोनों गुटों में सुलह की भी कोशिशें बहुत तेजी से हो रही हैं। अगर दोनों धड़ों में सुलह हो जाती है तब तो साइकिल पर दावेदारी की लड़ाई खत्म हो जाएगी लेकिन अगर सुलह नाकाम रहती है और आयोग साइकिल चुनाव चिह्न को फ्रीज करता है तब वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न पर भी दोनों धड़े विचार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक साइकिल नहीं मिलने की स्थिति में अखिलेश गुट जहां साइकिल से मिलते-जुलते नाम जैसे मोटरसाइकिल की मांग करेगा वहीं मुलायम सिंह गुट ने राष्ट्रीय लोकदल के चुनाव चिह्न (हल जोतता किसान) को अपनाने की तैयारी कर रखी है।

आयोग में मुलायम धड़े ने दावा किया कि पार्टी की स्थापना मुलायम सिंह यादव ने की है। चुनाव चिह्न साइकिल पर उनके हस्ताक्षर हैं, इसलिए ये उन्हें मिलना चाहिए। उधर, अखिलेश धड़े का दावा है कि पार्टी के 90 फीसदी सांसद, विधायक और पदाधिकारी उनके साथ हैं, इसलिए चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम पर उनका अधिकार है।

इधर, अखिलेश गुट की तरफ से रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल ने मोर्चा संभाला जबकि मुलायम सिंह गुट की तरफ से शिवपाल सिंह यादव और अमर सिंह ने मोर्चा संभाला। गौरतलब है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने राम गोपाल यादव पर भाजपा से मिलकर सपा को तोड़ने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि अपने पुत्र और बहू को सीबीआई से बचाने के लिए राम गोपाल यादव भाजपा से मिलकर सपा को तोड़ रहे हैं।

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