Punjab News: पंजाब में हेरोइन आसानी से मिलने के मुद्दे पर राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सबके सामने सवाल पूछने के एक दिन बाद संगरूर के एक दिहाड़ी मजदूर ने कथित तौर पर जहर खा लिया। उसने आरोप लगाया था कि उसका बेटा ड्रग्स का आदी हो गया है। बाद में सोमवार को लुधियाना के अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

अपनी मौत से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में गुलजार सिंह ने आरोप लगाया, “वित्त मंत्री चीमा रविवार को लोगों की शिकायतें सुनने के लिए गांव आए थे, जहां मैंने ‘चिट्टा’ (हेरोइन) के आसानी से मिलने का मुद्दा उठाया था। मेरा बेटा ड्रग्स का आदी है और अपनी लत को पूरा करने के लिए उसने घर का सामान तक बेच दिया है।”

वीडियो में गुलजार ने क्या आरोप लगाए?

दिरबा निर्वाचन क्षेत्र के रहने वाले गुलजार सिंह ने आरोप लगाया कि अगली सुबह कुछ लोग उनके घर आए और वित्त मंत्री के सामने ड्रग्स की समस्या का मुद्दा उठाने के लिए उन्हें धमकाया और बताया कि गांव के सरपंच और पंचायत सदस्य उनसे खेतों के पास मिलना चाहते हैं। वीडियो में गुलजार सिंह ने कहा, “अगर मेरी मौत हो जाती है, तो इसके लिए वे सभी जिम्मेदार होंगे।”

पुलिस ने मंगलवार को गांव की सरपंच बलजिंदर कौर, उनके पति बलजिंदर सिंह उर्फ ​​राज और पंचायत सदस्य विक्की सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया। इस घटना ने एक बार फिर मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर को विवादों के केंद्र में ला दिया है। 2 सितंबर को, एक सिख व्यक्ति को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया था। उसने संगरूर जिले के एक गांव में लोगों को संबोधित करते हुए सीएम मान को काला झंडा दिखाया था और ड्रग्स की समस्या से निपटने के सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए नारे लगाए थे।

खबरों के मुताबिक, गुलजार सिंह को सरपंच से मिलने की धमकी दी गई थी। इसके बाद वह डर गया और पंचायत सदस्यों से मिलने जाने के बजाय उसने जहरीला पदार्थ खा लिया।

इस घटना ने पंजाब के सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खबरों के मुताबिक, गुलजार को पहले संगरूर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल रेफर कर दिया गया। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें वापस संगरूर लाया गया और एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उन्हें लुधियाना के डीएमसीएच में ट्रांसफर कर दिया गया।

समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान- बीजेपी नेता

बीजेपी के स्थानीय नेता दामन बाजवा ने आरोप लगाया कि गुलजार को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने में करीब सात घंटे लग गए। बाजवा ने कहा, “यह चौंकाने वाली बात है कि पंजाब के सरकारी अस्पतालों में जहर खा चुके मरीज के इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। अगर उन्हें समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।”

हालांकि, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन परिस्थितियों में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया, जिनके कारण कथित तौर पर गुलजार ने जहर का सेवन किया था।

चीमा ने कहा, “जी हां, मैं रविवार को तूर बंजारा गांव गया था, क्योंकि मैं नियमित रूप से अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से मिलता रहता हूं। गुलजार सिंह ने नशीली दवाओं की उपलब्धता का मुद्दा उठाया और मुझे बताया कि उनका बेटा नशे का आदी है। मैंने उनकी शिकायत सुनी और पुलिस को नशीली दवाओं की आपूर्ति में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं पता कि सोमवार को क्या हुआ या किन परिस्थितियों में उसने जहर खाया। यह एक गंभीर जांच का विषय है। पुलिस इसकी जांच कर रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

मैंने उसकी बात सुनी- चीमा

गुलजार को धमकी दिए जाने के आरोपों का जवाब देते हुए चीमा ने कहा कि विपक्ष एक गलत कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहा है। वित्त मंत्री ने कहा, “उस व्यक्ति ने मुझसे सवाल किए और मैंने उसकी बात सुनी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसने अपनी जान गंवा दी।”

यह भी पता चला है कि संगरूर पुलिस सोमवार को गुलजार के घर गई थी ताकि उसके बेटे को नशामुक्ति केंद्र ले जाया जा सके। इस बीच, दिरबा की डीएसपी रूपिंदर कौर बाजवा ने कहा कि गुलजार की मौत आत्महत्या का मामला है। उन्होंने कहा, “हम परिवार के बयान के आधार पर कार्रवाई करेंगे।”

हालांकि, डीएसपी ने कहा कि पुलिस को परिवार से ऐसा कोई बयान नहीं मिला है जिसमें गुलजार की मौत को उस घटना से जोड़ा गया हो, जिसमें उन्होंने वित्त मंत्री से सवाल पूछा था या उसके बाद मिली कथित धमकियों से जोड़ा गया हो। कुछ महीने पहले गुलजार के एक रिश्तेदार की मौत हो गई थी, जो खुद भी नशे का आदी था।

विपक्ष ने बोला हमला

शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि गुलजार सिंह की मौत सच बोलने की कीमत थी। उन्होंने कहा, “गुरुदोखी के शासन में सवाल पूछना गुनाह बन गया है! दिरबा में, तूर बंजारन गांव के एक बेबस पिता ने कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा से पूछा, “मेरा जवान बेटा खुलेआम नशा करता है। आप नशाखोरी क्यों नहीं रोकते।” उन्होंने कहा कि सच बोलने की कीमत क्या? पुलिस ने उसे धक्का देकर किनारे कर दिया, जबकि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने उस पर माफी मांगने का दबाव डाला! इस अपमान से दुखी होकर गुलजार सिंह ने जहरीला पदार्थ खा लिया।

उन्होंने नशीली दवाओं की समस्या पर सवाल उठाने वाले लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान की कड़ी आलोचना की। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने गुलजार सिंह की मौत पर दुख जताया। वड़िंग ने कहा, “उनकी मौत राज्य में फैली नशीली दवाओं की समस्या की एक गंभीर याद दिलाती है, जिसे आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार अपने करोड़ों रुपये के विज्ञापनों के जरिये छिपाने की कोशिश करती है। लेकिन सच को ज्यादा देर तक छिपाया नहीं जा सकता।”

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पंजाब में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बीजेपी पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को बचाने का आरोप लगाया है। लॉरेंस बिश्नोई इन दिनों अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। बताना होगा कि बिश्नोई का नाम जाने-माने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या, बॉलीवुड स्टार सलमान खान, एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या समेत कई मामलों में सामने आ चुका है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…