मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को सौंपी गई एक रपट में यह खुलासा किया गया है कि बांधवगढ़ अभयारण्य में साल 2025 के आखिरी और 2026 के शुरुआती कुल ढाई महीने की अवधि की दौरान आठ बाघों की मौत हो गई। इनमें से चार बाघों की मौत करंट लगने से हुई। बांधवगढ़ के क्षेत्र निदेशक द्वारा प्रस्तुत रपट में कहा गया है कि बाघ अभयारण्य के भीतर चार बाघों की मौत हुई है जबकि इतने ही बाघों ने ‘सामान्य वन क्षेत्र’ में अपनी जान गंवाई।

रपट में कहा गया है कि अभयारण्य के भीतर सभी चार बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक था, जबकि सामान्य वन क्षेत्र में बिजली के झटके से शेष चार की मौत हुई। मध्य प्रदेश के जंगलों में संदिग्ध परिस्थितियों में बाघों की मौत का दावा करने वाली एक याचिका के जवाब में बुधवार को हाई कोर्ट की एक खंडपीठ में यह रपट सौंपी गई।

याचिका पर अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को स्थिति रपट पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 25 मार्च के लिए निर्धारित की। रपट के अनुसार, बांधवगढ़ अभयारण्य में 21 नवंबर, 2025 से इस साल दो फरवरी के बीच आठ बाघों की मौत हो गई। अभयारण्य के अंदर आपसी संघर्ष के कारण दो बाघों की मौत हो गई जबकि एक की मौत कुएं में डूबने से हुई और एक ने बीमारी के कारण दम तोड़ दिया।

रिपोर्ट में कहा गया कि वन क्षेत्र में बिजली का करंट लगने से चार बाघों की मौत हुई। वन क्षेत्र के कोर और बफर जोन के अंदर बिजली लाइनों का उल्लेख करते हुए रपट में कहा गया है कि बिजली के तारों को सुव्यवस्थित करने और अभयारण्य के संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण मानकों का पालन करने के लिए समय-समय पर बिजली विभाग को पत्र भेजे गए हैं।

रपट में साथ ही गश्त के संबंध में भी जानकारी दी गई तथा सरकार ने मुख्य याचिका पर जवाब भी दाखिल किया। भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने यह याचिका दायर की थी। याचिका में ‘टाइगर स्टेट’ मध्य प्रदेश में बाघों का जीवन असुरक्षित होने का दावा करते हुए कहा है कि साल 2025 में राज्य में सबसे अधिक 54 बाघों की मौत हुई है। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत के बाद से एक साल में सबसे ज्यादा बाघों की मौत हुई है और इनमें से 57 फीसद की मौत का कारण अप्राकृतिक है।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग से तथा एनटीसीए से जवाब तलब किया था। याचिका में राज्य में बाघों के शिकार को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है।

रपट में कहा गया है कि अभयारण्य के भीतर सभी चार बाघों की मौत का कारण प्राकृतिक था, जबकि सामान्य वन क्षेत्र में बिजली के झटके से शेष चार की मौत हुई। मध्य प्रदेश के जंगलों में संदिग्ध परिस्थितियों में बाघों की मौत का दावा करने वाली एक याचिका के जवाब में बुधवार को हाई कोर्ट की एक खंडपीठ में यह रपट सौंपी गई। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग से तथा एनटीसीए से जवाब तलब किया था।

यह भी पढ़ें- कुनो में मृत मिली मादा चीता, तेंदुए से लड़ाई में गंवाई जान 

मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में एक मादा चीता मृत पाई गई है। अधिकारियों को आशंका है कि यह एक तेंदुए के साथ लड़ाई में मारी गई होगी। साल 2022 में अफ्रीका से कुनो में चीतों को लाए जाने के बाद से यह इस तरह की पहली घटना है। कुनो राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र निदेशक द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, अधिकारियों को सोमवार शाम लगभग 6.30 बजे जंगल में मादा चीता मृत मिली थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक